
ज्ञान और तर्क की रोशनी से ही अज्ञानता
के अंधकार को मिटाया जा सकता है।
— राजा राममोहन राय
राजा राममोहन राय की यह कालजयी पंक्ति मानव समाज को अंधविश्वास और कुरीतियों से मुक्त करने का स्पष्ट मार्ग दिखाती है। इसका सीधा अर्थ है कि अज्ञानता रूपी अंधकार को केवल खोखले दावों से नहीं, बल्कि सच्चे ज्ञान और तर्कसंगत सोच की रोशनी से ही मिटाया जा सकता है। भारतीय पुनर्जागरण के जनक राजा राममोहन राय का मिजाज अत्यंत वैज्ञानिक, सुधारवादी और विवेकशील था। वे अंधभक्ति के कड़े विरोधी थे और समाज को पुरानी रूढ़ियों से निकालकर तर्क और मौलिक चिंतन की ओर ले जाना चाहते थे।
आज के डिजिटल युग में, जहाँ सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाएँ, अफवाहें और वैचारिक संकीर्णता तेजी से फैल रही हैं, यह कथन और भी अधिक प्रासंगिक हो उठता है। आज के संदर्भ में इसका अर्थ है कि बिना सोचे-समझे किसी बात को स्वीकार करने के बजाय सवाल पूछना और तर्क की कसौटी पर कसना आवश्यक है। समाज में फैले विद्वेष और अज्ञान को दूर करने के लिए विवेक की यह रोशनी आज सबसे ज्यादा जरूरी है ताकि एक जागरूक और प्रगतिशील समाज बन सके।
राजा राममोहन राय की चुनी हुई पंक्तियाँ
राजा राममोहन राय के बारे में
राजा राममोहन राय (1772–1833) आधुनिक भारत के जनक और ब्रह्म समाज के संस्थापक थे। उन्होंने सती प्रथा के अंत और महिला अधिकारों के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किया। पूरा परिचय और सभी विचार: राजा राममोहन राय — लेखक कोश।
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