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17 Sep 2026 · awaraalfaz · 1 मिनट का पाठ
रहीम ख़ानेख़ाना: रहिमन ओछे नरन ते, बैर भलो ना नाइ। छाँड़े
चित्र: CC BY 4.0 — Vyacheslav Argenberg · Wikimedia Commons

रहिमन ओछे नरन ते, बैर भलो ना नाइ। छाँड़े

ड़े काटै क्यौं भलो, काटे चाटे काइ॥

— रहीम ख़ानेख़ाना

रहीम ख़ानेख़ाना की यह पंक्ति नीच और ओछी मानसिकता वाले लोगों से दूर रहने की व्यावहारिक सलाह देती है। रहीम कहते हैं कि ऐसे व्यक्तियों से न दुश्मनी अच्छी होती है और न ही दोस्ती। वे कुत्ते के उदाहरण से समझा

रहीम ख़ानेख़ाना की चुनी हुई पंक्तियाँ

बिगाड़ें बात बने नहीं, लाख करो किन कोइ। रहीमन फाटे दूध को, मथे न माखन होय॥
धीरज धरिए समय कै, देखि दिनन को फेर। जब नीकें दिन आवत हैं, बनत न लागत देर॥
प्रीति कठिन है प्रेम की, मूँड़ कटाए बोल। कहि रहीम ते उबरै, जो रस सके न तोल॥
बड़ेन को लघु बोलिबे, नहिं रहीम घटि जाय। गिरधर मुरलीधर कहे, कछु दुख मानत नाहिं॥
रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि। जहाँ काम आवे सुई, का करे तरवारि॥
जे गरीब पर हित करै, ते रहीम बड़े लोग। कहा सुदामा बापुरो, कृष्ण मितावन जोग॥
जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग। चंदन विष व्यापत नहीं, लपटे रहत भुजंग॥

रहीम ख़ानेख़ाना के बारे में

रहीम ख़ानेख़ाना मध्यकालीन भारत के प्रसिद्ध कवि, सेनापति और प्रशासक थे। उनका पूरा नाम अब्दुल रहीम खान-ए-खाना था और वे अकबर के नवरत्नों में शामिल थे। वे हिंदी भक्ति काव्य और नीतिपरक दोहों के लिए अमर हैं। पूरा परिचय और सभी विचार: रहीम ख़ानेख़ाना — लेखक कोश

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लेखकawaraalfaz

वाह वाह यार की संपादकीय टीम हिंदी में शिक्षा, पैसा-फाइनेंस, बिज़नेस, सरकारी योजनाओं और जीवन से जुड़ी जाँची-परखी जानकारी लिखती है। हर लेख आधिकारिक स्रोतों से मिलाकर और आसान भाषा में तैयार किया जाता है।

प्रकाशित: 17 September 2026 · अपडेट: 17 September 2026 · हमारे बारे में · संपर्क

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