
यदि तुम हमेशा वही करते रहोगे जो हमेशा से करते
आए हो, तो वही पाओगे जो हमेशा से पाते आए हो।
— बेंजामिन फ्रैंकलिन
बेंजामिन फ्रैंकलिन का यह कथन जीवन में बदलाव और नवोन्मेष की आवश्यकता को उजागर करता है। यह पंक्ति सीधे तौर पर कहती है कि यदि हम अपने काम करने के तरीकों को नहीं बदलेंगे, तो परिणाम भी वही पुराने ही मिलेंगे। फ्रैंकलिन एक व्यावहारिक, दूरदर्शी और यथार्थवादी विचारक थे। उनका मिजाज किसी कोरी कल्पना में बहने वाले कवि का नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक मार्गदर्शक का है, जो इंसान को अपनी पुरानी आदतों और लकीर के फकीर बनने की प्रवृत्ति से बाहर निकलने के लिए ललकारता है। वे सतत सुधार और प्रगतिशील सोच के पक्के समर्थक थे।
आज के तेज़ रफ्तार और प्रतिस्पर्धी दौर में इस विचार की प्रासंगिकता बहुत अधिक है। यदि हम अपने कम्फर्ट ज़ोन में सिमटे रहेंगे और नया सीखने से कतराएंगे, तो जीवन में कभी कोई बड़ा सुधार नहीं हो पाएगा। करियर, शिक्षा या व्यक्तिगत जीवन—हर क्षेत्र में नई सफलता पाने के लिए नए विचार और अलग प्रयास बेहद ज़रूरी हैं। यह पंक्ति हमें सिखाती है कि अगर हम जीवन में बेहतर और नए परिणाम चाहते हैं, तो अपनी सोच, रणनीति और कार्यशैली को समय के साथ बदलना ही होगा।
बेंजामिन फ्रैंकलिन की चुनी हुई पंक्तियाँ
बेंजामिन फ्रैंकलिन के बारे में
बेंजामिन फ्रैंकलिन (1706–1790) अमेरिका के महान राजनेता, वैज्ञानिक और लेखक थे। वे अमेरिका के संस्थापकों में से एक थे जिन्होंने अमेरिकी स्वतंत्रता की घोषणा का मसौदा तैयार करने में मदद की। पूरा परिचय और सभी विचार: बेंजामिन फ्रैंकलिन — लेखक कोश।
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