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20 Sep 2026 · awaraalfaz · 1 मिनट का पाठ
स्वामी रामतीर्थ: प्रकृति के साथ एकरूप हो जाना ही सच्ची
चित्र: CC BY 4.0 — Vyacheslav Argenberg · Wikimedia Commons

प्रकृति के साथ एकरूप हो जाना ही सच्ची

साधना और शांति का मार्ग है।

— स्वामी रामतीर्थ

स्वामी रामतीर्थ (1873–1906) की यह पंक्ति आज भी उतनी ही सटीक लगती है। नीचे उनकी चुनी हुई पंक्तियाँ पढ़िए।

स्वामी रामतीर्थ की चुनी हुई पंक्तियाँ

सच्चा प्रेम वह है जो किसी प्राप्ति की उम्मीद नहीं रखता, बल्कि केवल देना और त्याग करना जानता है।
जो मनुष्य अपने कर्तव्य को पूरी निष्ठा से निभाता है, उसे ईश्वर की खोज में कहीं और भटकने की आवश्यकता नहीं होती।
प्रेम ही भगवान है और भगवान ही प्रेम है, इसके अलावा कुछ भी सत्य नहीं है।
संपूर्ण संसार एक ही परिवार है और वासुधैव कुटुंबकम का भाव ही सच्चा धर्म है।
अपने मन की शक्तियों को पहचानिए, क्योंकि असीम ऊर्जा का भंडार हर इंसान के भीतर ही छिपा हुआ है।
जब दो आत्माएँ अहंकार से मुक्त होकर मिलती हैं, तो वही सच्ची और पवित्र मित्रता कहलाती है।
मौन सबसे बड़ी भाषा है जिसमें ईश्वर से सीधा संवाद होता है।

स्वामी रामतीर्थ के बारे में

स्वामी रामतीर्थ (1873–1906) एक महान संत, दार्शनिक और वेदांत के प्रचारक थे। उन्होंने अपने ओजस्वी भाषणों से पश्चिमी देशों में भारतीय अध्यात्म की गहरी छाप छोड़ी। अल्पायु में ही उन्होंने संन्यास लिया और गंगा तट पर महासमाधि ली। पूरा परिचय और सभी विचार: स्वामी रामतीर्थ — लेखक कोश

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लेखकawaraalfaz

वाह वाह यार की संपादकीय टीम हिंदी में शिक्षा, पैसा-फाइनेंस, बिज़नेस, सरकारी योजनाओं और जीवन से जुड़ी जाँची-परखी जानकारी लिखती है। हर लेख आधिकारिक स्रोतों से मिलाकर और आसान भाषा में तैयार किया जाता है।

प्रकाशित: 20 September 2026 · अपडेट: 20 September 2026 · हमारे बारे में · संपर्क

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