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23 Sep 2026 · awaraalfaz · 1 मिनट का पाठ
गौतम बुद्ध: दीपक की तरह बनो जो स्वयं जलकर दूसरों को रो
चित्र: CC BY 4.0 — Vyacheslav Argenberg · Wikimedia Commons

दीपक की तरह बनो जो स्वयं जलकर दूसरों को रोशनी

देता है, ज्ञान का मार्ग भी ऐसा ही है।

— गौतम बुद्ध

महात्मा बुद्ध की यह कालजयी पंक्ति आत्म-त्याग, परोपकार और ज्ञान के वास्तविक स्वरूप को रेखांकित करती है। यह विचार बताता है कि सच्चा ज्ञान प्राप्त करना और बाँटना सहज नहीं है

गौतम बुद्ध की चुनी हुई पंक्तियाँ

घृणा से घृणा कभी खत्म नहीं होती, घृणा केवल प्रेम से समाप्त होती है, यही सनातन नियम है।
पानी की बूंद जब समुद्र में गिरती है तो वह समुद्र बन जाती है, जब वह अलग रहती है तो उसका अस्तित्व सीमित होता है।
क्रोध में हजार शब्द बोलने से बेहतर है कि आप चुप रहें, आपकी चुप्पी शांति लाती है।
अपने मोक्ष के लिए स्वयं ही प्रयास करो, दूसरों पर निर्भर मत रहो।
आप अपने विचारों से ही बनते हैं, जैसा आप सोचते हैं वैसा ही आप बन जाते हैं।
जो व्यक्ति अपने मन को वश में कर लेता है, उसके लिए जीतना किसी देवता के लिए भी असंभव नहीं है।
स्वास्थ्य सबसे बड़ा लाभ है, संतोष सबसे बड़ा धन है और विश्वास सबसे बड़ा संबंध है।

गौतम बुद्ध के बारे में

गौतम बुद्ध (563–483 ईसा पूर्व) बौद्ध धर्म के संस्थापक और महान दार्शनिक थे। उन्होंने संसार के दुखों से मुक्ति के लिए मध्यम मार्ग और अष्टमार्ग का उपदेश दिया। उनके विचार आज भी पूरी दुनिया में शांति और करुणा का संदेश देते हैं। पूरा परिचय और सभी विचार: गौतम बुद्ध — लेखक कोश

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वाह वाह यार की संपादकीय टीम हिंदी में शिक्षा, पैसा-फाइनेंस, बिज़नेस, सरकारी योजनाओं और जीवन से जुड़ी जाँची-परखी जानकारी लिखती है। हर लेख आधिकारिक स्रोतों से मिलाकर और आसान भाषा में तैयार किया जाता है।

प्रकाशित: 23 September 2026 · अपडेट: 23 September 2026 · हमारे बारे में · संपर्क

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