
प्रेम अधिकार नहीं, बल्कि एक निःस्वार्थ
और पवित्र समर्पण की अनुभूति है।
— जैनेंद्र कुमार
आज के दौर में, जहाँ रिश्ते अक्सर स्वार्थ, अधिकार और शर्तों पर टिके होते हैं, जैनेंद्र जी का यह विचार बेहद प्रासंगिक है। आज लोग प्रेम को एक अधिकार के रूप में देखने लगे हैं,
जैनेंद्र कुमार की चुनी हुई पंक्तियाँ
सच्ची सफलता बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि अंतःकरण की संतुष्टि और शांति में बसती है।
कहानी केवल घटना नहीं, बल्कि पात्र के मन की एक गहरी थाह होती है।
समय का वास्तविक सदुपयोग वर्तमान में पूरी तल्लीनता और ईमानदारी से जीने में ही है।
आधुनिक हिंदी गद्य में जैनेंद्र ने विचारों को नई गहराई और दिशा प्रदान की।
त्याग वह आंतरिक शक्ति है जो मनुष्य को भौतिक बंधनों से मुक्त कर देती है।
मेहनत केवल पेट भरने का साधन नहीं, वह मनुष्य के आंतरिक विकास और साधना की प्रक्रिया है।
जीवन का यथार्थ बाहरी घटनाओं में नहीं, बल्कि आंतरिक अनुभूतियों में बसता है।
जैनेंद्र कुमार के बारे में
जैनेंद्र कुमार हिंदी कथा साहित्य के प्रमुख मनोवैज्ञानिक कथाकार और निबंधकार थे। उन्होंने प्रेमचंदोत्तर युग में व्यक्ति को केंद्र में रखकर कहानियों और उपन्यासों की रचना की। उनके लेखन में भारतीय संस्कृति और पाश्चात्य मनोविज्ञान का अनूठा संगम मिलता है। पूरा परिचय और सभी विचार: जैनेंद्र कुमार — लेखक कोश।
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