
आओ बैठो कुछ बातें करें, पुरानी
या नई, जो दिल को छू जाए।
— नागार्जुन
यह पंक्ति जनकवि नागार्जुन की सहज आत्मीयता और मानवीय जुड़ाव की गहरी चाह को दर्शाती है। इसमें बिना किसी औपचारिकता के साथ बैठने और सुख-दुख बाँटने का
नागार्जुन की चुनी हुई पंक्तियाँ
सिंदूर तिलकित भाल, मेरे नैना हुए बेहाल।
कायरता की चादर ओढ़कर मत बैठो यार।
वतन के वास्ते कुछ तो करना ही होगा।
जनता मुझसे पूछ रही है, क्या बतलाऊँ?
समय बड़ा बलवान, सबको सब याद रहता है।
प्यासी पथराई आँखें, जाने किस-किस का रस्ता जोहती रहती हैं।
कई दिनों तक पानी भी चूँ-चूँ करता रहा।
नागार्जुन के बारे में
नागार्जुन आधुनिक हिंदी और मैथिली साहित्य के महान कवि एवं उपन्यासकार थे। उनका मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था और वे 'यात्री' उपनाम से भी लिखते थे। जनजीवन से उनका गहरा जुड़ाव होने के कारण उन्हें 'जनकवि' के रूप में जाना जाता है। पूरा परिचय और सभी विचार: नागार्जुन — लेखक कोश।
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