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11 Oct 2026 · awaraalfaz · 1 मिनट का पाठ
नागार्जुन: आओ बैठो कुछ बातें करें, पुरानी
चित्र: CC BY 4.0 — Vyacheslav Argenberg · Wikimedia Commons

आओ बैठो कुछ बातें करें, पुरानी

या नई, जो दिल को छू जाए।

— नागार्जुन

यह पंक्ति जनकवि नागार्जुन की सहज आत्मीयता और मानवीय जुड़ाव की गहरी चाह को दर्शाती है। इसमें बिना किसी औपचारिकता के साथ बैठने और सुख-दुख बाँटने का

नागार्जुन की चुनी हुई पंक्तियाँ

सिंदूर तिलकित भाल, मेरे नैना हुए बेहाल।
कायरता की चादर ओढ़कर मत बैठो यार।
वतन के वास्ते कुछ तो करना ही होगा।
जनता मुझसे पूछ रही है, क्या बतलाऊँ?
समय बड़ा बलवान, सबको सब याद रहता है।
प्यासी पथराई आँखें, जाने किस-किस का रस्ता जोहती रहती हैं।
कई दिनों तक पानी भी चूँ-चूँ करता रहा।

नागार्जुन के बारे में

नागार्जुन आधुनिक हिंदी और मैथिली साहित्य के महान कवि एवं उपन्यासकार थे। उनका मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था और वे 'यात्री' उपनाम से भी लिखते थे। जनजीवन से उनका गहरा जुड़ाव होने के कारण उन्हें 'जनकवि' के रूप में जाना जाता है। पूरा परिचय और सभी विचार: नागार्जुन — लेखक कोश।

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वाह वाह यार की संपादकीय टीम हिंदी में शिक्षा, पैसा-फाइनेंस, बिज़नेस, सरकारी योजनाओं और जीवन से जुड़ी जाँची-परखी जानकारी लिखती है। हर लेख आधिकारिक स्रोतों से मिलाकर और आसान भाषा में तैयार किया जाता है।

प्रकाशित: 11 October 2026 · अपडेट: 11 October 2026 · हमारे बारे में · संपर्क

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