
जीवन का सौंदर्य संघर्षों से भागने में नहीं,
बल्कि उनका डटकर मुकाबला करने में है।
— यशपाल
प्रसिद्ध कथाकार और क्रांतिकारी लेखक यशपाल की यह पंक्ति जीवन के प्रति उनके जुझारू और प्रगतिशील मिजाज को दर्शाती है। यशपाल जी यथार्थवाद के समर्थक थे और वे जीवन में पलायनवाद यानी जिम्मेदारियों से भागने की प्रवृत्ति को गलत मानते थे। यह पंक्ति कहती है कि जीवन का वास्तविक आनंद और सुंदरता चुनौतियों से बचने में नहीं, बल्कि उनका निडरता से सामना करने में है। जब मनुष्य कठिनाइयों का डटकर मुकाबला करता है, तभी उसकी आंतरिक क्षमता और व्यक्तित्व का सही विकास होता है।
आज के भागदौड़ भरे और तनावपूर्ण दौर में यह विचार अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है। वर्तमान समय में लोग असफलता या मानसिक दबाव से डरकर अक्सर पीछे हट जाते हैं या आसान रास्ते तलाशते हैं। ऐसे में यश
यशपाल की चुनी हुई पंक्तियाँ
यशपाल के बारे में
यशपाल हिंदी के महान कथाकार, निबंधकार और उपन्यासकार थे। उनका जन्म 3 दिसंबर 1903 को पंजाब के फिरोजपुर छावनी में हुआ था। वे मार्क्सवादी विचारधारा से जुड़े थे और हिंदी कथा-साहित्य में प्रगतिशील चेतना के प्रमुख हस्ताक्षर माने जाते हैं। पूरा परिचय और सभी विचार: यशपाल — लेखक कोश।
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