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मीराबाई
भक्त कवयित्री
मीराबाई
1498–1547
मीराबाई सोलहवीं शताब्दी की एक महान कृष्ण-भक्त कवयित्री थीं। उनका जन्म मेड़ता के कुड़की गाँव में हुआ था और उनकी भक्ति मुख्य रूप से माधुरी भाव की थी। उनके पद आज भी उत्तर भारत में बड़े प्रेम से गाए जाते हैं।
मीराबाई का जन्म लगभग 1498 ईस्वी में राठौड़ राजवंश में हुआ था। उनका विवाह मेवाड़ के सिसोदिया कुल में राजकुमार भोजराज के साथ हुआ था, किंतु कम उम्र में ही विधवा हो जाने के कारण उनका अधिकांश जीवन ईश्वर की आराधना में बीता। उन्होंने राजसी सुख-सुविधाओं को त्यागकर साधुओं की संगति अपनाई और मंदिरों में कृष्ण के समक्ष नृत्य किया। उनकी काव्य-भाषा में राजस्थानी, ब्रजभाषा और गुजराती शब्दों का सहज मिश्रण मिलता है। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'मीरा के पद' और 'गीत गोविंद टीका' मुख्य रूप से प्रसिद्ध हैं। मीराबाई का निधन 1547 ईस्वी के आसपास द्वारका में माना जाता है।
मीराबाई के अनमोल विचार
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो
वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु, कृपा करि अपनायो