
कौन आ सकता है इस राह से जाने के लिए
दिल मिरा राह में बैठा है जमाने के लिए
— मोमिन ख़ाँ मोमिन
उर्दू के प्रसिद्ध शायर मोमिन ख़ाँ मोमिन का यह शेर इश्क़ के अड़ियल और खुद्दार मिज़ाज को दर्शाता है। यहाँ शायर कह रहे हैं कि जिस राह पर उनका
मोमिन ख़ाँ मोमिन की चुनी हुई पंक्तियाँ
दोस्ती की जो कसम खाई है हमने कभी, उम्र भर इसको निभाना ही पड़ा है हमको।
हसरत-ए-बोस-ए-लब से दम निकला जाता है
किस क़दर मुश्किल से ये जान बचाई हमने
किस क़दर मुश्किल से ये जान बचाई हमने
जो ज़माने की नज़र में है ख़ता-वार बहुत, दिल की अदालत में वो बेकसूर पाया गया।
कौन कहता है कि बाज़ार में बिक जाता हूँ, कोई ठुकरा दे तो मैं और सँवर जाता हूँ।
बेवफा तुझसे जो उम्मीद-ए-वफ़ा होती है
जान जाती है मगर दिल की दुआ होती है
जान जाती है मगर दिल की दुआ होती है
तुम मेरे पास होते हो गोया
जब कोई दूसरा नहीं होता
जब कोई दूसरा नहीं होता
किस तरह कटती है ये रात मिरे जाने के बाद, कोई पूछे तो ज़रा हाल मिरे दिल का कहे।
मोमिन ख़ाँ मोमिन के बारे में
मोमिन ख़ाँ मोमिन 19वीं सदी के प्रसिद्ध उर्दू शायर थे। वे अपने जटिल प्रेम-वर्णन और दार्शनिक सोच के लिए जाने जाते हैं। मिर्ज़ा ग़ालिब के समकालीन इस शायर ने अपनी ग़ज़लों में इश्क़ की गहराई को बखूबी उकेरा। पूरा परिचय और सभी विचार: मोमिन ख़ाँ मोमिन — लेखक कोश।
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