
कठिनाइयां और सामाजिक विरोध इंसान के हौसले को और अधिक
मजबूत बनाते हैं, रुकना कभी भी विकल्प नहीं होता।
— सावित्रीबाई फुले
सावित्रीबाई फुले (1831–1897) की यह पंक्ति आज भी उतनी ही सटीक लगती है। नीचे उनकी चुनी हुई पंक्तियाँ पढ़िए।
सावित्रीबाई फुले की चुनी हुई पंक्तियाँ
बिना शिक्षा के बुद्धि का विकास नहीं होता, बुद्धि के बिना मनुष्य का विवेक मर जाता है और विवेकहीन व्यक्ति पशु समान हो जाता है।
ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से किया गया कठिन परिश्रम कभी व्यर्थ नहीं जाता, उसका परिणाम समाज को दिशा देता है।
समय किसी के लिए नहीं रुकता, इसलिए हर पल का उपयोग समाज के उत्थान और गरीबों की सेवा में करना चाहिए।
सत्य की खोज और मानवता की सेवा ही मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है।
शिक्षा ही वह चाबी है जो गुलामी के ताले को खोलकर मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।
जो स्त्री पढ़ना-लिखना सीख जाती है, वह अपनी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संवार देती है।
जाति और धर्म के भेदभाव को मिटाकर मानवता को ही अपना एकमात्र धर्म मानो।
सावित्रीबाई फुले के बारे में
सावित्रीबाई फुले (1831–1897) भारत की पहली महिला शिक्षिका, महान समाज सुधारक और कवयित्री थीं। उन्होंने अपने पति ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर 1848 में पुणे में देश का पहला बालिकाओं का विद्यालय शुरू किया था। पूरा परिचय और सभी विचार: सावित्रीबाई फुले — लेखक कोश।
विज्ञापन · Advertisement
ये भी पढ़ें
काव्यअल्लामा इक़बाल: न पूछ इन मदरसा-वालों से मक़्सूद-ए-सबक़ क्यन पूछ इन मदरसा-वालों से मक़्सूद-ए-सबक़ क्या है, ये बेचारे तो इल्म-ए-बे-हुनर की जुस्तजू में हैं। — अल्लामा इक़बाल18 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यकेदारनाथ अग्रवाल: सच्चा दोस्त वही है जो विपत्तिसच्चा दोस्त वही है जो विपत्ति के समय अकेला न छोड़े। — केदारनाथ अग्रवाल15 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यस्वामी रामतीर्थ: प्रकृति के साथ एकरूप हो जाना ही सच्चीप्रकृति के साथ एकरूप हो जाना ही सच्ची साधना और शांति का मार्ग है। — स्वामी रामतीर्थ20 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यनेल्सन मंडेला: जब तक काम पूरा न हो जाए, वहजब तक काम पूरा न हो जाए, वह हमेशा असंभव ही लगता है। — नेल्सन मंडेला22 Sep 2026 पढ़ें →