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21 Sep 2026 · awaraalfaz · 1 मिनट का पाठ
सावित्रीबाई फुले: कठिनाइयां और सामाजिक विरोध इंसान के हौसले
चित्र: CC BY 4.0 — Vyacheslav Argenberg · Wikimedia Commons

कठिनाइयां और सामाजिक विरोध इंसान के हौसले को और अधिक

मजबूत बनाते हैं, रुकना कभी भी विकल्प नहीं होता।

— सावित्रीबाई फुले

सावित्रीबाई फुले (1831–1897) की यह पंक्ति आज भी उतनी ही सटीक लगती है। नीचे उनकी चुनी हुई पंक्तियाँ पढ़िए।

सावित्रीबाई फुले की चुनी हुई पंक्तियाँ

बिना शिक्षा के बुद्धि का विकास नहीं होता, बुद्धि के बिना मनुष्य का विवेक मर जाता है और विवेकहीन व्यक्ति पशु समान हो जाता है।
ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से किया गया कठिन परिश्रम कभी व्यर्थ नहीं जाता, उसका परिणाम समाज को दिशा देता है।
समय किसी के लिए नहीं रुकता, इसलिए हर पल का उपयोग समाज के उत्थान और गरीबों की सेवा में करना चाहिए।
सत्य की खोज और मानवता की सेवा ही मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है।
शिक्षा ही वह चाबी है जो गुलामी के ताले को खोलकर मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।
जो स्त्री पढ़ना-लिखना सीख जाती है, वह अपनी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संवार देती है।
जाति और धर्म के भेदभाव को मिटाकर मानवता को ही अपना एकमात्र धर्म मानो।

सावित्रीबाई फुले के बारे में

सावित्रीबाई फुले (1831–1897) भारत की पहली महिला शिक्षिका, महान समाज सुधारक और कवयित्री थीं। उन्होंने अपने पति ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर 1848 में पुणे में देश का पहला बालिकाओं का विद्यालय शुरू किया था। पूरा परिचय और सभी विचार: सावित्रीबाई फुले — लेखक कोश

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लेखकawaraalfaz

वाह वाह यार की संपादकीय टीम हिंदी में शिक्षा, पैसा-फाइनेंस, बिज़नेस, सरकारी योजनाओं और जीवन से जुड़ी जाँची-परखी जानकारी लिखती है। हर लेख आधिकारिक स्रोतों से मिलाकर और आसान भाषा में तैयार किया जाता है।

प्रकाशित: 21 September 2026 · अपडेट: 21 September 2026 · हमारे बारे में · संपर्क

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