
तमिल कवि
भारती दासन
1891–1964
भारती दासन (1891–1964) आधुनिक तमिल साहित्य के महान क्रांतिकारी कवि और द्रविड आंदोलन के प्रमुख स्तंभ थे। उनका मूल नाम कनकसुब्बुरत्तनम था और वे महाकवि सुब्रह्मण्य भारती के अनन्य भक्त थे।
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भारती दासन का जन्म 29 अप्रैल 1891 को पुदुचेरी में हुआ था। उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से तमिल भाषा, समाज सुधार, और तार्किक विचारों का जोरदार प्रचार किया। वे जाति व्यवस्था, असमानता और अंधविश्वास के कट्टर विरोधी थे। उनकी कविताओं में क्रांतिकारी तेवर और प्रकृति प्रेम का अनूठा संगम मिलता है। उन्हें 'पुरतची कविग्नार' (क्रांतिकारी कवि) के रूप में भी जाना जाता है। उनकी रचनाएं तमिल राष्ट्रवाद और सामाजिक न्याय की प्रेरणास्त्रोत रहीं।
भारती दासन के अनमोल विचार
शिक्षा ही वह चाबी है जो समाज के हर एक पीड़ित व्यक्ति के लिए स्वतंत्रता के द्वार खोलती है।
जाति और धर्म के नाम पर इंसान को बांटने वाली हर दीवार को जड़ से उखाड़ फेंकना होगा।
महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार और शिक्षा मिले बिना कोई भी समाज आगे नहीं बढ़ सकता।
कविता केवल मनोरंजन के लिए नहीं है, यह समाज में क्रांतिकारी बदलाव लाने का एक सशक्त हथियार है।
पाखंड और अंधविश्वास समाज के सबसे बड़े दुश्मन हैं, जिनसे हमें हमेशा सतर्क रहना चाहिए।
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श्रमिक वर्ग की मेहनत से ही यह दुनिया चलती है, इसलिए उन्हें उनका हक मिलना ही चाहिए।
स्वतंत्रता केवल राजनीतिक नहीं होनी चाहिए, बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्वतंत्रता भी उतनी ही जरूरी है।
तमिल भूमि वीरों और विद्वानों की धरती है, इसका इतिहास हमारे लिए सबसे बड़ा प्रेरणा स्रोत है।
अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना हर जागरूक नागरिक और कवि का सबसे पहला और बड़ा कर्तव्य है।
समतावादी समाज की स्थापना ही मेरा मुख्य सपना और मेरी संपूर्ण कविता का मूल उद्देश्य है।
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