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20 Oct 2026 · awaraalfaz · 1 मिनट का पाठ
अशफ़ाक़उल्ला ख़ान: दिल की उम्मीदों का मौसम अब सुहाना हो गया,
चित्र: CC BY 4.0 — Vyacheslav Argenberg · Wikimedia Commons

दिल की उम्मीदों का मौसम अब सुहाना हो गया, वतन

की राह में कुर्बान होना नजराना हो गया।

— अशफ़ाक़उल्ला ख़ान

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ान की यह पंक्तियाँ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उस अद्वितीय जज़्बे को बयां करती हैं, जहाँ देश की आज़ादी के लिए जान न्यौछावर करना कोई मजबूरी नहीं, बल्कि एक गर्व और सौभाग्य बन गया था। इन पंक्तियों में कवि का मिजाज गहरी देशभक्ति, अदम्य साहस और प्रेम का एक ऐसा अनूठा संगम है, जहाँ मातृभूमि के प्रति समर्पण ही जीवन का सबसे बड़ा उत्सव बन जाता है। फाँसी के फंदे को गले लगाते समय भी उनके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी, बल्कि यह विश्वास था कि उनका यह बलिदान देशवासियों के दिलों में स्वतंत्रता की अलख जगाएगा। उनके लिए वतन की राह का हर काँटा एक फूल की तरह था, और मौत को गले लगाना किसी खूबसूरत मौसम के आने जैसा पावन अनुभव था।

आज के संदर्भ में इन पंक्तियों का अर्थ केवल ऐतिहासिक न रहकर अत्यधिक प्रासंगिक हो गया है। आज जब समाज में स्वार्थ, उदासीनता और व्यक्तिगत लाभ की भावना बढ़ रही है, तब अशफ़ाक़उल्ला ख़ान का यह काव्य हमें सिखाता है कि राष्ट्र और समाज के प्रति हमारी भी कुछ नैतिक जिम्मेदारियाँ हैं। “कुर्बान होना नजराना हो गया” केवल शहादत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर उस नागरिक के लिए प्रेरणा है जो ईमानदारी, सच्चाई और देशहित के लिए अपने छोटे-छोटे स्वार्थों का त्याग करता है। यह पंक्ति हमें याद दिलाती है कि देश सेवा कोई बोझ नहीं, बल्कि एक ऐसा पवित्र कर्तव्य है जिसे हर नागरिक को गर्व और खुशी के साथ निभाना चाहिए।

अशफ़ाक़उल्ला ख़ान की चुनी हुई पंक्तियाँ

जुल्म की जंजीरों को तोड़कर हम आगे बढ़ेंगे, भारत माँ को स्वतंत्र कराके ही अब हम दम लेंगे।
मौत तो एक दिन आनी ही है, क्यों न वह मौत ऐसी हो जो देश के इतिहास में अमर हो जाए।
देशद्रोहियों और अन्याय के खिलाफ लड़ना ही हर इंसान का सबसे बड़ा और पहला धर्म है।
देश की आज़ादी के परवानों की मज़ारों पर यही फूल चढ़ेंगे, कि हर आने वाली पीढ़ी इस राह पर जान देने से पीछे न हटे।
ऐ मेरे वतन के लोगों, कभी हमें भी याद रखना, हँसते-हँसते दी है जान, बस इतना ख्याल रखना।
शिक्षा और चेतना के बिना समाज में न्याय की कल्पना करना बेमानी है, जागना होगा।
वक्त आने पर बता देंगे तुझे ऐ आसमान, हम अभी से क्या बताएं क्या हमारे दिल में है।

अशफ़ाक़उल्ला ख़ान के बारे में

अशफ़ाक़उल्ला ख़ान (22 अक्टूबर 1900 – 19 दिसंबर 1927) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी और कवि थे। वे रामप्रसाद 'बिस्मिल' के घनिष्ठ मित्र और काकोरी कांड के प्रमुख नायकों में से एक थे। देश की आज़ादी के लिए हँसते-हँसते फाँसी पर झूलने वाले वे अमर शहीद थे। पूरा परिचय और सभी विचार: अशफ़ाक़उल्ला ख़ान — लेखक कोश।

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वाह वाह यार की संपादकीय टीम हिंदी में शिक्षा, पैसा-फाइनेंस, बिज़नेस, सरकारी योजनाओं और जीवन से जुड़ी जाँची-परखी जानकारी लिखती है। हर लेख आधिकारिक स्रोतों से मिलाकर और आसान भाषा में तैयार किया जाता है।

प्रकाशित: 20 October 2026 · अपडेट: 20 October 2026 · हमारे बारे में · संपर्क

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