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रहीम
कवि और सेनापति
रहीम
1556–1627
रहीम (अब्दुल रहीम खान-ए-खाना) मध्यकालीन हिंदी साहित्य के महान कवि, नीतिार और सेनापति थे। वे अकबर और जहाँगीर के दरबार में प्रतिष्ठित थे और उनका काव्य मानवीय मूल्यों से ओत-प्रोत है।
अब्दुल रहीम खान-ए-खाना का जन्म 1556 ईस्वी में हुआ था और उनका देहावसान 1627 में हुआ। वे बैरम खां के पुत्र और मुग़ल दरबार के नौ रत्नों में शामिल थे। राजनीति और युद्ध-कौशल के साथ-साथ उनका अधिकार ब्रजभाषा और अवधी पर भी समान रूप से था। उनके दोहे भारतीय जनमानस में नीति, आचरण और प्रेम की सीख के लिए आज भी अत्यंत प्रसिद्ध हैं। उनकी प्रमुख रचनाओं में रहीम सतसई, बरवै नायिका प्रबोध और रास पंचाध्यायी शामिल हैं।
रहीम के अनमोल विचार
रहीमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय
टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ जाय परिध