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जयशंकर प्रसाद
कवि और नाटककार
जयशंकर प्रसाद
1889–1937
जयशंकर प्रसाद (1889–1937) आधुनिक हिंदी साहित्य के छायावादी युग के प्रमुख स्तंभ थे। उन्होंने अपनी कविताओं, नाटकों और कथाओं में भारतीय संस्कृति और मानवीय भावनाओं का अनूठा चित्रण किया।
जयशंकर प्रसाद का जन्म 30 जनवरी 1889 को वाराणसी के एक प्रतिष्ठित सुंघनी साहू परिवार में हुआ था। वे हिंदी कविता में 'छायावाद' के प्रवर्तकों में गिने जाते हैं और उनकी 'कामायनी' को आधुनिक हिंदी महाकाव्य का शिखर माना जाता है। उन्होंने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नाटकों जैसे 'ध्रुवस्वामिनी', 'स्कंदगुप्त' और 'चंद्रगुप्त' के माध्यम से भारतीय नाट्यकला को नया जीवन दिया। उनके साहित्य में दार्शनिकता, प्रकृति प्रेम, राष्ट्रीय चेतना और करुणा का अत्यंत सुंदर समन्वय दिखाई देता है। 15 नवंबर 1937 को क्षय रोग के कारण अल्प आयु में ही उनका निधन हो गया, लेकिन उनका साहित्य अमर हो गया।
जयशंकर प्रसाद के अनमोल विचार
अरुण यह मधുമय देश हमारा, जहाँ पहुँच अनजाने क्षितिज को मिलता एक सहारा।