Islamic Shayari75+ इस्लामिक शायरी — Islamic Shayari in Hindi
ईमान, सब्र और दुआ पर। नीचे दी गई हर शायरी को एक क्लिक में कॉपी करके स्टेटस पर लगाइए।
अंधेरी रातों में जब कोई सहारा नहीं मिलता
हमें रब के सिवा कोई किनारा नहीं मिलता
सब्र की बात करते हैं जो लोग महफ़िल में
उन्हें इम्तिहान का कोई इशारा नहीं मिलता
दुआ मांगो तो आँखें नम होना लाज़मी है
बिना टूटे कभी कोई सितारा नहीं मिलता
हमारे दिल की हर धड़कन में बस इक नाम होता है
उसी दर पर हमारा रोज़ का सलाम होता है
हवाएं लाख रोकें अपने रस्ते की ये राहें
भरोसा जिस पे हो वो ही मुकाम होता है
ज़माने भर की ठोकर खा के जब हम लौट आते हैं
तिरी रहमत के साये में सुकून हम पाते हैं
गुज़र जाता है हर इक गम जो दिल में सब्र आ जाए
अंधेरे घर में भी फिर नूर सा इक छा जाए
विज्ञापन · Advertisement
किसी की आह पर भी आसमान हिल जाता है
खुदा के सामने जब कोई सच्चा दिल झुकाता है
समंदर पार करने की दुआ जो मांग लेते हैं
ख़ुदा खुद ही किनारों को करीब ले आते हैं
गुनाहों के समंदर में जो तिनका डूबता होगा
पुकारे जब खुदा को वो संभल सा जाता होगा
खामोशी से जो सह लो तुम ज़माने के सितम सारे
तुम्हारे हक़ में फिर बोलेंगे ये रोशन सितारे
दुआ वो तीर है जो बे-निशां भी काम करता है
अंधेरे वक्त में जो रास्ता आसान करता है
सब्र की छांव में बैठो तो धूप लगती नहीं
खुदा के ज़िक्र से बढ़कर कोई जड़ी बूटी नहीं
झुकाते हैं जब हम सर को तिरी चौखट पे ऐ मौला
तिरे सजदे से बढ़कर कोई भी दौलत नहीं
उम्मीदों के दिया को आंधियों से डर नहीं लगता
खुदा पर हो भरोसा तो सफर मुश्किल नहीं लगता
जो रोते हैं अकेले में तिरे डर पर दुआ के साथ
उन्हें दुनिया हिला सकती नहीं ता-उम्र बात के साथ
न मांगो गैर से कुछ भी जो देना हो वही दे दे
तिरे खजाने में तो हर मर्ज़ की दवा मिल ही जाए
निगाहें फेर लीं सब ने मगर तू साथ है मेरे
अंधेरा लाख गहरा हो तिरा प्रकाश है मेरे
ज़ुबां पर ज़िक्र तेरा हो तो दिल को चैन मिलता है
तिरी रहमत का हर इक फूल खिला सा दिखता है
सब्र रखना ही असली मोमिन की निशानी है
तिरे हर एक इम्तिहान में रज़ा की कहानी है
दुआओं में असर हो तो ज़मीन भी हिल सकती है
खुदा की मर्जी हो तो तक़दीर भी बदल सकती है
भटक जाते हैं जो रस्ते में दुनिया की चमक दमक देख कर
उन्हें फिर राह दिखलाता है बस इक नामी रहबर
अंधेरी रात में उठ कर जो मांगता है दुआएं
फरिश्ते आ के उसके सिर को सहला कर चले जाएं
सब्र का घूंट जो पीता है ज़माने की नजर में
वही इंसान चमकता है खुदा की इस नज़र में
तमाम रंजो-अलम को दिल से जो रुख़्सत कर देता है
सब्र का दामन थाम कर वो हर मुश्किल को हरा देता है
राहें कठिन हों तो कदम डगमगाना नहीं
मालिक पे रखते हैं जो भरोसा वो कभी हारते नहीं
हर मुसीबत में दिल को ये यकीन दिलाते हैं
सब्र रखने वालों के साथ खुद खुदा आते हैं
जब दुनिया की हर उम्मीद टूटने लगती है
तब खाली झोली दुआओं से भरने लगती है
खामोश लबों की फरियाद भी वो सुनता है
जो दिल की गहराई से पुकारे उसे ही चुनता है
रातों के सन्नाटे में जब आँखें बरसती हैं
दुआओं की बरसों से ये ज़मीन तरसती है
इम्तिहान तो उसका महबूब ही लेता है
जो बंदा हर हाल में शुक्रिया कहता है
हर दर्द का मरहम उसकी रज़ा में छिपा है
जो सब्र कर गया वो रास्ता पा गया है
मांगना है तो बस उस एक से मांगो
जो बंदे की हर आह पर मुस्कुराता है
अंधेरों में दीया जलाने की जरूरत क्या है
जब सर झुकाने से हर मुश्किल आसान होती है
दिल की बेताबी को जो करार देता है
वो रब हर बेसहारा को संभाल लेता है
जख्म गहरे हों तो ज़ुबां पे शिकवा न लाओ
सब्र की चादर ओढ़कर बस दुआ मांगो
हर एक सांस पर उसका ही पहरा होता है
जो अल्लाह से जुड़े उसका मुकद्दर सुनहरा होता है
तन्हाई में जब कोई सुनने वाला न हो
तब सजदों में रोने का मज़ा ही कुछ और हो
विज्ञापन · Advertisement
किस्मत की लकीरों से ज्यादा वो ताकतवर है
जो हर मायूस दिल का मुहाफ़िज़ और मददगार है
आँसुओं की भाषा वो खुदा खूब जानता है
बिना कहे हर एक दर्द को पहचानता है
मुश्किलें जब हद से ज्यादा बढ़ जाती हैं
तब दुआएं ही तकदीर बदल जाती हैं
हर आह पर उसकी रहमत फिसलती है
सब्र करने वाले के घर बरकत उतरती है
दुनिया की भीड़ में जो अकेला पड़ जाता है
वो सजदे में गिरकर अपना सब पा जाता है
दिल की हर उलझन को जो सुलझा देता है
वो रब किसी को कभी रुलाता नहीं हमेशा हंसाता है
मांगने का सलीका जिसे आ जाता है
उसका हर एक खाली बर्तन भर जाता है
हर सुबह नया पैगाम-ए-उम्मीद लाती है
सब्र की राह मंजिल तक पहुँचाती है
फिक्र किस बात की जब वो साथ है हरदम
जो हर एक सांस का रखवाला है हरदम
जब जुबां पर दुआओं का पहरा होता है
तब हर तूफ़ान का रुख भी ठहरता होता है
दुनिया के हर सहारे से जब दिल उचट जाए
तब अल्लाह का नाम ही सुकून बन जाए
गम की धूप में जो खुद को जलाता नहीं
सब्र का दामन वो कभी छुड़ाता नहीं
सीने में जब भी कोई अनकहा सा दर्द हो
सजदे में झुक के अश्क बहाना कमाल है
हर एक मोड़ पे मिलती है आज़माइश नई
मगर ये दिल है कि हर हाल में संभल गया
जो अपने रब की रज़ा में राज़ी हो गया
समझो जहाँ का वो सबसे अमीर शख्स है
ख़ुदा की रहमतों का कोई हिसाब थोड़ी है
वो बिन मांगे ही हर एक झोली भरता है
गुनाहों के समंदर में जो डूबे थे कभी
दुआ की एक बूंद ने उनको पाक कर दिया
अंधेरे रास्ते हों या कि कोई मोड़ तंग
बस इक निगाह-ए-करम रब की काम आती है
ज़ुबां पे ज़िक्र हो जिसका वो नाम है प्यारा
उसी के वास्ते ये दिल हमारा धड़कता है
मुसीबत जब भी सर पे आ के ठहरती है
सब्र का दामन थाम के इक दुआ होती है
उम्मीदों के दिए बुझने नहीं देता कभी
वो खालिक सब की सुनता है जो रोता है
तलब दुनिया की हो तो लोग भटक जाते हैं
तलबगार-ए-ख़ुदा को सब कुछ मिल जाता है
बिखरने लगती है जब ज़िंदगी की हर लड़ी
तब जा के बन्दूक-ए-दुआ असर दिखाती है
नसीब अपना लिखा है उसने अपने हाथ से
हमें शिकवा किसी से भी नहीं करना कभी
रातों के सन्नाटे में जब होती है गुफ़्तगू
रब सुनता है खामोश आहें भी बन्दों की
हवा के रुख से कभी तय नहीं होती उड़ान
भरोसा जिसपे हो वो खालिक साथ रहता है
दर्द की धूप में जलता है जो शख्स यहाँ
सब्र की छांव में वो चैन से सो जाता है
उठाओ हाथ तो दिल की सदा भी शामिल हो
दुआ वो है जो सीधा अर्श तक पहुँच जाए
ज़माने भर की ठोकर खा के जो लौटा यहाँ
उसे मिला है सुकून सिर्फ सजदे में जा के
गुनाहगार हैं हम पर नाउम्मीद नहीं
हमारे रब की रहमत का किनारा बहुत बड़ा है
ज़ुबां खामोश रहती है मगर दिल चीखता है
खामोशी की ये भाषा मेरा मौला जानता है
मुकद्दर के लिखे को कौन सकता है बदल
दुआ वो चीज़ है जो लकीरें फेर देती है
सज़ा समझ के जो कांटों पे चल पड़े हम लोग
वहीँ से राह-ए-मदीना हमें नज़र आई
खौफ दुनिया का दिल से निकाल फेंको जरा
मदद को उसकी फरिश्ते उतर के आते हैं
निगाहें फेर लीं सब ने सितमगर बन के
मगर मेरे ख़ुदा ने दामन थाम लिया मेरा
हर एक सांस पे उसका ही एहसान है यारो
सजदा-ए-शुक्र में सर झुकता रहे उम्र भर
बयां क्या करें हम अपनी तन्हाई का किस्सा
हमारा रब ही हर पल हमदर्द बन के साथ है
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
इस्लामिक शायरी क्या है?
इस्लामिक शायरी वह शायरी है जो ईमान, सब्र और दुआ पर लिखी जाती है। इस पेज पर 75+ मौलिक शायरी एक जगह हैं।
क्या ये शायरी मुफ़्त इस्तेमाल कर सकते हैं?
हाँ। COPY बटन दबाइए और WhatsApp स्टेटस, Instagram बायो या Facebook पर लगाइए।
नई शायरी कब जुड़ती है?
इस पेज पर हर हफ्ते नई शायरी जुड़ती है। आप अपनी शायरी भी यहाँ भेज सकते हैं।