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Desh Bhakti Shayari

75+ देशभक्ति शायरी — Desh Bhakti Shayari in Hindi

वतन और शहीदों के नाम। नीचे दी गई हर शायरी को एक क्लिक में कॉपी करके स्टेटस पर लगाइए।

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परिंदों को भी अब तो यही पैगाम देना है
वतन की खातिर अपना हर इक दिन नाम देना है
लहू की बूंद से जो सरज़मीं को सींच जाते हैं
वही सच्चे मुहाफ़िज़ देश की तारीख़ पाते हैं
हवाओं में घुली है जो महक उस वीर की खुशबू
वतन के नाम कर दी जान जिसने हँसते-हँसते ही
तिरंगे की ये आन और बान हम से ही ज़िंदा है
इसी मिट्टी में अपनी रूह का हर एक परिंदा है
नहीं रुकेंगे कदम चाहे मुसीबत लाख आ जाए
वतन की आبرو पर आंच कोई कैसे आ जाए
हमारे खून से रोशन है ये जन्नत का नज़ारा
यही मिट्टी हमारा दीन, ईमान और सहारा है
वतन की सरहदें महफूज जिस दीवार से हैं
वो सीना तान कर खड़े जवानों का कमाल है
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शहीदों की चिता पर जब कभी मेला लगेगा
वतन वालों को उनका हर निशां अपना लगेगा
कलम की धार हो या फिर शमशीर का पहरा
वतन से प्यार ही हर आशिक़ का मजहब सुनहरा है
दिलों में आग सी ले कर जो तूफ़ान से खेलते हैं
वही जांबाज भारत माँ की गोद में पले-बढ़े हैं
सफर ये आखिरी हो या नया आगाज़ हो कोई
वतन की शान में सर झुक न पाए किसी का कभी
ज़माने भर में गूंजेगा सदा ये गीत अपना ही
वतन के नाम पर कुर्बान है हर मीत सपना ही
अंधेरी रात में भी जो मशालें बन के जलते हैं
वतन की राह में वो शेर बेखौफ होकर चलते हैं
हमारे जिस्म का हर एक कतरा देश का है कर्ज
यही पैगाम लेकर हम निभाते आए हैं फर्ज
कफन में लिपटे जब कोई सिपाही घर लौटता है
ज़माना देख कर उसको हमेशा फक्र करता है
वतन की खातिर अगर इम्तिहान कोई भी आए
हमारी जान भी हाजिर है गर आवाज़ लग जाए
फिज़ाओं में महकती है शहादत की वो खुशबू
जिसे महसूस करते हैं हमेशा आसमान और रूह
सियासत चाहे कुछ भी हो मगर हम जान देते हैं
वतन के वास्ते हँसकर नया बलिदान देते हैं
तिरंगा देखकर आंखों में आंसू आ ही जाते हैं
ये वो परचम है जिसपर हम जान लुटाते हैं
वतन की धूल माथे पर सजाकर जो निकलते हैं
जमाने भर के रास्तों के वो सूरज ढलते हैं
परिंदे भी गवाही देंगे इस आज़ादी की यारों
शहीदों के लहू से रंगी है ये ज़मीन सारों
वतन के वास्ते जीना वतन के वास्ते मरना
यही है ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत सा झरना
हवाएं खुद चुरा लेती हैं खुशबू उन शहीदों की
जो लिख आए हैं गाथाएं बदन पर अपने गोलियों की
दिलों में मुल्क की उल्फत का दरिया बह रहा है
हर इक नौजवान आज इंकलाब कह रहा है
वतन से बढ़ के कोई दूसरा भगवान क्या होगा
इसी मिट्टी पे मिट जाना ही असली मान क्या होगा
तिरंगा थाम कर जो सरहद की छाती पर डट जाते हैं
वही तो लोग हैं जो हर दिलों में ज़िंदा रहते हैं
वतन की आبرو पर जान अपनी वार देते हैं
परिंदे भी उसी मिट्टी को अपना घर समझते हैं
हमारे जिस्म का हर एक कतरा इस ज़मीन का है
हमारी साँस में बसता सदा ये देश अपना है
शहीदों के लहू से रंजो-गम सब धुल जाते हैं
वतन के वास्ते जीते हैं और इस पर मिट जाते हैं
वतन की शाख़ पर खिलते हैं जो ऐसे भी ग़ुंचे हैं
जिया करते हैं वो सदियों जो इन राहों से गुज़रे हैं
अंधेरी रात में जो अपनी जान का दीपक जलाते हैं
वही तो देश के माथे पे इक रोशन सितारा हैं
हमारे खून से सींचा गया है जो ये गुलशन है
इसी की छाँव में अपना जहान और मेरा बचपन है
शहादत का ये परचम जो हवा में आज लहराता
इसी पर जान देने का हर इक आशिक़ इरादा है
लहू के रंग से लिखी है हमने दास्ताँ अपनी
हमारी प्यास बुझाती है हमेशा ये ज़मीं अपनी
तिरंगे की कसम खाकर जो आगे पाँव बढ़ाते हैं
वो दुश्मन के भी सीने पर तिरंगा गाड़ आते हैं
वतन की खाक से हमने वफ़ा की शर्त बाँधी है
इसी मिट्टी में अपनी आखिरी मन्ज़िल की साँसें हैं
जो अपने देश के खातिर लहू का जाम पीते हैं
ज़माने भर में वो परवाने अमर होकर जिया करते हैं
अंधेरे दौर में भी इक उजाला छोड़ जाते हैं
वो परवाने वतन के वास्ते खुद को जलाते हैं
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ज़मीं ये माँ है अपनी, इससे रिश्ता पुराना है
इसकी हिफ़ाज़त में हमें हर हाल में मर जाना है
वतन के नाम पर जिसने भी अपना सर झुकाया है
ज़माने ने उसी को सरताज अपना माना है
हमारे पाँव की हर आहट पे दुश्मन काँप जाता है
वतन का नाम लेते ही लहू में जोश आता है
जो सीने पर गोली खा के भी पीछे नहीं हटते
वही भारत के सच्चे लाल हैं, जो कभी नहीं डरते
दुआ है रब से मेरी ये ज़मीं आबाद रहे सदा
मेरा हर इक लहू का कतरा वतन के नाम हो मेरा
वतन की गोद में सोए हैं जो ऐसे भी दीवाने हैं
उन्हीं की याद से روشن हमारे सारे अफ़साने हैं
शहीदों की इबारत को ज़माना याद रखता है
वतन पर जान देने का हुनर आबाद रहता है
हवाओं मेंी जो गूँजती है वो वीरों की कहानी है
वतन की हर गली में आज भी उनकी निशानी है
चिराग़ों को बुझाने की हवा में ताक़त नहीं होती
वतन पर जान देने की कभी कीमत नहीं होती
हमारे दिल की धड़कन में वतन का नाम रहता है
शहादत का ये सिलसिला हमेशा आम रहता है
बुलंदी पर हमेशा देश का परचम रहेगा ये
इसी उम्मीद पर मेरा लहू हरदम बहेगा ये
तिरंगे के ये तीन रंग हमें पहचान देते हैं
वतन के नाम पर जीना हमें ईमान देते हैं
वतन के वास्ते सीने पे जो गोली उठाते हैं
वही तो लोग दुनिया में नया इतिहास लाते हैं
मिटाने देश को जो भी कभी नापाक बढ़ते हैं
हमारे शेर सीमा पर चट्टान बनके अड़ते हैं
तिरंगे को जो सीने से लगाए घूमते हैं हम
वतन की आन पर दुनिया को पल में भूल जाते हैं
जमीन अपनी है, अंबर है, ये सरहद जान से प्यारी
वतन के वास्ते कुर्बान है अपनी हर एक यारी
अंधेरी रात में जलकर जो परवाना हुए ज़िंदा
वतन की शम्अ पर देखो वो जाँ-बाँ हो गए फिदा
लहू की धार से इस देश का नक्शा सजाते हैं
वो दीवाने जवानी देश के नाम लिखा जाते हैं
वतन की खाक में जब तक हमारी जान बाकी है
तब तक देश के दुश्मन पे हर इक आन बाकी है
सियासत चाहे कुछ समझे, मोहब्बत देश से जारी
वतन की एक हँसी पर जान है अपनी सदा वारी
तिरंगे के कफ़न में जो मुकद्दर आज लाते हैं
वही तो देश के माथे पे नया इक चाँद लाते हैं
वतन के नाम से चलती है साँसें और धड़कन भी
इसी मिट्टी पे कुर्बान अपनी सारी उलफत भी
न तलवारों की खामोशी, न बंदूकों का डर देखा
वतन के वास्ते हमने हमेशा हौसला सर पर धरा देखा
परिंदों की तरह आजाद हम इस देश में जीते
वतन के नाम का हर जाम हम हँसकर हैं पीते
वतन की आज़ादी को हम कभी झुकने न देंगे
परिंदे भी यहाँ दुश्मन के पर उड़ने न देंगे
लहू से जो लिखी जाती है वो तारीख होती है
वतन पे जान देने की अदा इक सीख होती है
तिरंगे की ये पावन छाँव हम पर जो सलामत है
वतन की हर एक मिट्टी में खुदा की ही इनायत है
वतन के रास्तों पर जो निशान अपने छोड़ आए
जमाने भर में वो वीरों की सूरत नाम कर आए
दिलों में आग सी लेकर जो सरहद पर डटे रहते
वतन के वास्ते वो लोग हर मुश्किल में हँसते रहते
हमारे खून का हर एक कतरा देश का है अब
वतन की आबरू पर आंच आएगी न रुकेंगे हम कभी तब
जमीन-ए-हिन्द से रिश्ता हमारा रूह का निकला
वतन के वास्ते हर जख्म से इक फूल सा खिला
हवाओं में जो गूँजती है सदा उन बांके वीरों की
वतन की गोद में सोई है तकदीर इन तसवीरों की
न कोई जात, न मजहब, वतन सबसे बड़ा हमको
वतन की राह में मिटना ही, लगा है अब नशा हमको
हमारे बाद भी इस देश की खुशबू महकती हो
वतन की शान में हर इक जुबां से बात कहती हो
अंधेरा छा भी जाए तो उजाला हम बनाएंगे
वतन की खाक पर सूरज नया हर रोज लाएंगे
तिरंगे के तीन रंगों में बसी है अपनी दुनिया सारी
वतन के नाम पर अपनी ये जान भी है बहुत वारी
शहादत जिनका गहना है, वतन जिनका मुकद्दर है
उन्हीं के दम से आबाद ये सारा नीला अंबर है

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

देशभक्ति शायरी क्या है?

देशभक्ति शायरी वह शायरी है जो वतन और शहीदों के नाम लिखी जाती है। इस पेज पर 75+ मौलिक शायरी एक जगह हैं।

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