Sad Shayari100+ सैड शायरी — Sad Shayari in Hindi
दर्द, जुदाई और टूटे दिल के लिए। नीचे दी गई हर शायरी को एक क्लिक में कॉपी करके स्टेटस पर लगाइए।
रोज आँखों में समंदर तैरता रहता है मेरे
कौन कहता है कि हम प्यासे नहीं रहते कभी
उसने जाने की जो जल्दी में दिखाई मुझको
पाँव में अपने ही जंजीर दिखाई मुझको
अब किसी से भी गिला क्या करें ऐ जाने-वफ़ा
हमने खुद अपने ही हाथों से बुझाए हैं दिए
तेरी तस्वीर को सीने से लगा लेते हैं
जब भी हम खुद को अकेला सा पाते हैं
रात भर जागने की एक ही कीमत है यहाँ
सुबह उठते ही बिखर जाते हैं चेहरे के निशान
हमने चाहा था कि हालात बदल जाएँगे
वक्त बदला तो हमारे भी खयालात बदल गए
दिल की हर बात जमाने से छुपा ली हमने
तेरी यादों को मुकद्दर बना लिया हमने
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कोई शिकवा न कोई हुज्जत बची है अब
दरमियान हमारे बस एक दूरी बची है अब
मेरे हिस्से में तन्हाई ही तन्हाई आई
जब भी दुनिया ने मोहब्बत की दुहाई आई
रास्ते सारे भटक जाते हैं मंजिल की तरफ
कोई साया नहीं चलता है हमारे साथ यहाँ
खुद को खोकर तुझे पाने की जिद थी मेरी
अब न तू हाथ में है और न ही अपना पता
अजनबी शहर में अपनों की तलाश अच्छी थी
उम्र भर इस भ्रम में कटे लम्हे तमाम
जख्म इतने दिए उसने कि गिनती न रही
हम भी चुपचाप रहे बात कोई भी न बढ़ी
नींद आँखों से कुछ इस तरह जुदा हो गई
जैसे इस शहर से पहचान हवा हो गई
तेरी चौखट पे बहुत देर खड़े रहे हम
फिर हवाओं से लिपट कर घर चले आए हम
कौन समझेगा यहाँ टूटते दिल की आवाज
सब तमाशबीन हैं चेहरे की हँसी देखते हैं
एक चेहरा था जो आँखों में बसा रहता था
आज वो शख्स ही आँखों से जुदा रहता है
तेरी यादों के सहारों ही जिए जाते हैं
वरना जीने का हुनर कौन जानता है यहाँ
हमने खामोश रहकर भी दर्द बयाँ किया
पर किसी ने हमारे दिल का पता न लिया
रात की तन्हाई में जब तेरा खयाल आता है
भीग जाती हैं पलकें और दिल भर आता है
फासला ऐसा बढ़ा दिल से दिल का हमारे
पास रहकर भी कोई पास न आया कभी
वक्त के साथ बिखर जाती है हर एक चीज
हमने रेत पर अपना भी घर बनाया था कभी
तेरी दुनिया से बहुत दूर चले जाना है
अब किसी शख्स को आवाज न देनी होगी
हम तिरी याद में इस तरह से खामोश हुए
जैसे वीराने में कोई दीया बुझ जाए कभी
हर नए जख्म पे हँसने की अदा सीख ली
हमने दुनिया के तकाजों से वफ़ा सीख ली
वक्त के साथ बिखर जाने की आदत है हमें
तुम जो बिछड़े तो संभलने की तमन्ना न रही
खुद को आईने में देखा तो ये एहसास हुआ
टूट जाने पे भी आवाज़ नहीं होती है
शहर की भीड़ में खोने से डर लगता है हमें
जब से वो शख्स निगाहों से जुदा हो गया
चाँदनी रात में सहरा का सफर याद आया
जब भी पलकों पे कोई अश्क ठहर याद आया
लोग कहते हैं कि भूलो उसे जाने वाले को
दिल ये कहता है कि भूला हुआ समझा न करो
अब किसी मोड़ पे मिलने की दुआ मत मांगो
रास्ते अपने जुदा हो चुके तन्हाई में
जिक्र तेरा जो महफिल में कभी होता है
आँख झुक जाती है और दिल मेरा रोता है
तेरी यादों के सहारे ही तो कटती है रात
वरना इस शहर में अपना कोई घर तो न था
जिंदगी भर का सफर एक ही पल में कटा
जब उसने अलविदा कह के किनारा कर लिया
कागज की तरह जल गई तकदीर हमारी
कोई बुझाने भी न आया हमें पानी लेकर
अब हवाओं से शिकायत का कोई फायदा नहीं
जब मेरे घर के दर-ओ-दीवार ही गिर चुके
हमने रक्खा था बहुत संभल के रिश्ता अपना
तुमने हाथों की लकीरों सा मिटा दिया उसे
खामोशी चीख रही है मेरे सीने के अंदर
कोई सुनता नहीं इस दर्द की गहराई को
शाम ढलते ही जलाने लगे लोग दिए
हमने सीने में तेरी याद का घर फूँक दिया
दिल की हसरत थी कि वो हाल हमारा पूछे
वक्त बदला तो सवालों के जवाब ही बदल गए
रास्ते भर हमें तन्हाई का डर था बहुत
घर जो पहुँचे तो पता कोई हमारा न था
कौन सुनता है यहाँ बंद दरवाजों की सदा
हमने दीवारों से लिपटकर कई रातें काटीं
अश्क आँखों में छुपा कर जो मैं हँसता हूँ तो
लोग कहते हैं मुझे दर्द का एहसास नहीं
तेरी महफिल से उठे तो किसी काम के न रहे
ऐसे बिखरे कि समेटे न गए हाथ हमारे
दिल के वीराने में बस एक ही हसरत है अभी
तू अगर लौट के आए तो बहार आ जाए
रात भर जागने का हुनर सीख लिया हमने
जब से उसने ये कहा भूल जा मुझको अब
दर्द की धूप में जलता रहा तन्हा दिल मेरा
कोई बादल न कभी छांव की खातिर आया
किस को इल्जाम दें इस हाल की बर्बादी का
हमने खुद आग लगाई थी अपने ही घर में
बारिशें जब भी शहर में होती हैं
तेरी यादों की नमी होती है
हमने चाहा था तुम्हें हद से ज्यादा
और तुमने हदें ही पार कर दीं
टूट जाती है नींद तो आँखें भी रोती हैं
तेरी यादों की रातें भी लंबी होती हैं
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कोई शिकवा नहीं है अब मुक़द्दर से
हमारी किस्मत में ही अंधेरी रातें होती हैं
तुझे भूलने की कोशिशें रोज़ करता हूँ
पर हर रोज़ तेरी ही याद आ जाती है
तेरे जाने के बाद से ये हाल है मेरा
हँसते-हँसते आँख भर आ जाती है
हम तो बैठे थे तेरी राहों में पलकें बिछाए
तूने तो रास्ता ही बदल लिया हमारा
अब किस से कहें हाल-ए-दिल अपना
कोई सुनने वाला ही नहीं रहा हमारा
जख्म जब गहरे होते हैं तो निशान रहते हैं
अपनों के दिए हुए गम हमेशा याद रहते हैं
हमने तो बस वफ़ा का सिला चाहा था
बदले में बेवफाई के ही पैगाम रहते हैं
खामोशियाँ चीखती हैं अब इस कमरे में
तेरी आवाज़ कहीं खो गई है इस अंधेरे में
लोग पूछते हैं उदास रहने की वजह मुझसे
तेरा नाम लेने की हिम्मत नहीं होती मेरे में
रात भर जागने की आदत सी हो गई है
तेरी यादों से अब इबादत सी हो गई है
कोई पूछता है मुझसे मेरी बर्बादी का सबब
बस तेरी एक झलक की चाहत सी हो गई है
पलकों पर रुके आँसू गवाही देते हैं
तेरे जाने के बाद हम तन्हाई जीते हैं
लोग कहते हैं भूल जा उसे अब 'फ़राज़'
पर हम हर साँस में उसकी जुदाई पीते हैं
आईने में खुद को देखते हैं जब भी हम
तेरी ही परछਾਈ नजर आती है हरदम
तू तो बदल गया वक्त की चाल के साथ
हमारी तो जिंदगी ही ठहर गई है एकदम
दिल की हसरत दिल में ही दब कर रह गई
हमारी मोहब्बत सिर्फ एक कहानी बन कर रह गई
हम तो उम्र भर का साथ चाहते थे तुमसे
तुम्हारी बेवफाई हमारी निशानी बन कर रह गई
हर शाम ढलती है तेरे इंतज़ार में
उमर कट रही है अब इसी एक आध में
तूने तो मुड़कर भी नहीं देखा कभी
हम उलझ कर रह गए तेरे ख्यालात में
कागज पर उतारते हैं दर्द अपना हम
कलम रो पड़ती है जब लिखते हैं सनम
लोग वाह-वाह करते हैं हमारी शायरी पर
उन्हें क्या पता अंदर से टूटे हुए हैं हम
तेरी गली से आज भी गुजरते हैं हम
बस अब तेरा दरवाजा नहीं खटखटाते हैं हम
जमाना समझता है कि संभल गए हैं हम
पर अंदर ही अंदर रोज सिसकते हैं हम
दिल के अरमान आंसुओं में बह गए
जो कहना चाहते थे वो अनकहे रह गए
तू मिल न सका तो क्या हुआ ऐ जान
तेरी यादें हमारे हिस्से में सदा के लिए रह गईं
हाथों की लकीरों में तेरा नाम नहीं था
शायद हमारी किस्मत में आराम नहीं था
हम तो उम्र भर निभाते रहे रिश्ता वफ़ा का
तेरा इरादा कभी हमारे साथ का नहीं था
सीने में छुपा रखा है एक तूफान हमने
आंसुओं को बना लिया है अपनी पहचान हमने
तू खुश है अपने नए आशियाने में शायद
इसलिए ठुकरा दिया है हमारा मकान हमने
बेवफा कहूँ या अपनी किस्मत समझूँ
तेरी इन हरकतों को मैं क्या मूरत समझूँ
तू तो खेल गया मेरे जज्बातों के साथ
अब खुद को तेरी मोहब्बत या मुसीबत समझूँ
जिंदगी से अब कोई शिकायत नहीं रही
तेरी यादों के सिवा कोई राहत नहीं रही
हम तो जीते जी ही मर चुके हैं इस तरह
कि अब मौत आने की भी हसरत नहीं रही
महफिल में बैठते हैं तो खामोश रहते हैं
दिल का दर्द बस दिल में ही कहते हैं
कोई पूछ ले अगर उदासी की वजह हमसे
हम मुस्कुरा कर बात टाल देते हैं
तेरी यादों का सिलसिला खत्म क्यों नहीं होता
इस दिल का फैसला खत्म क्यों नहीं होता
लोग कहते हैं वक्त हर जख्म भर देता है
फिर मेरा ये सिलसिला खत्म क्यों नहीं होता
अब किसी से कोई उम्मीद नहीं बची
दिल में कोई नई आरजू नहीं बची
तू ले गया अपने साथ मेरी सारी खुशियां
अब मेरे पास रोने के सिवा कोई जुस्तजू नहीं बची
रात के सन्नाटे में तेरी आवाज सुनाई देती है
बंद आँखों में भी तेरी ही सूरत दिखाई देती है
हम तो तन्हाई के आदी हो चुके हैं इस कदर
कि हर परछाई में अब तेरी ही मूरत दिखाई देती है
रास्ते जुदा हुए तो दूरियाँ बढ़ गईं
दिल मिले न मिले, मजबूरियाँ बढ़ गईं
हम तो आज भी वहीं खड़े हैं इंतज़ार में
बस तेरे शहर की दूरियाँ बढ़ गईं
टूटे हुए कांच सा बिखर गया हूँ मैं
अपनों के ही वार से संवर गया हूँ मैं
तूने जो छोड़ा तो होश ही उड़ गए
खुद अपनी ही नजरों से उतर गया हूँ मैं
दर्द छुपा कर चेहरे पर हंसी लानी पड़ती है
दुनिया के वास्ते हर रोज अभिनय करनी पड़ती है
कोई पूछे जो हाल मेरा इस महफिल में
तो सीने पर पत्थर रख कर हाँ कहनी पड़ती है
शाम होते ही फिर से याद आ जाते हो
दिल के दरवाजे पर दस्तक दे जाते हो
हम भूलना भी चाहें तो कैसे भूलें तुम्हें
तुम हर दुआ, हर आह में छा जाते हो
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
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