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Maa Shayari

74+ माँ पर शायरी — Maa Shayari in Hindi

माँ के लिए दिल से लिखी लाइनें। नीचे दी गई हर शायरी को एक क्लिक में कॉपी करके स्टेटस पर लगाइए।

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उस शख्स की हर दुआ का असर दिखता है
जिसकी पेशानी को मेरी माँ चूम लेती है
अंधेरों में भी रास्ता मिल जाता है मुझे
जब माँ अपनी ममता का दिया जलाती है
खुदा से क्या मांगूं मैं अपनी जिंदगी के लिए
मेरी हर सांस में माँ की दुआ शामिल है
दुनिया की भीड़ में जब अकेला हो जाता हूँ
माँ तेरी गोद का सुकून याद आता है
मेरे चेहरे की हंसी देखकर जो रो पड़े
वो हस्ती सिर्फ मेरी माँ की होती है
उसके आंचल की छांव में जो सुकून है
वो महलों की दौलत में कहाँ मिलता है
मेरी हर खता को जो हंसकर टाल देती है
वो माँ ही है जो बेइंतहा प्यार करती है
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थक कर जब लौटता हूँ मैं शाम को घर
माँ के हाथों की चाय सारा दर्द मिटा देती है
दुआओं का असर मैंने खुद देखा है यारो
जब माँ मेरे माथे पर हाथ रखती है
जमाने भर की ठोकरों से जब हारा मैं
माँ ने सीने से लगाकर मुझे संभाल लिया
उसके बिना ये घर वीरान सा लगता है
माँ ही इस चमन की असली रौनक है
मेरी हर खुशी की इब्तिदा तुझसे है माँ
मेरी जिंदगी का हर सवेरा तुझसे है
वो भूखी रहकर भी हमें खाना खिलाती है
ऐसी ममता इस जहां में कहाँ मिल पाती है
उसकी आँखों के आँसू मुझसे देखे नहीं जाते
माँ को तकलीफ में देखकर दिल रोता है
मेरे गुनाहों पर भी जो पर्दा डालती है
वो फरिश्ता मेरी माँ के रूप में रहती है
उम्र भर जो हमारे लिए दुआ करती रही
उस माँ के कदमों में जन्नत बसर होती है
जब कभी बिखर जाता हूँ मैं जिंदगी में
माँ की एक बात मुझे फिर से जोड़ देती है
दुनिया की नजर में हम भले ही कुछ न हों
माँ की नजर में हम पूरी कायनात हैं
उसकी सादगी में ही सारा जहान बसता है
मेरी माँ जैसी इस दुनिया में कोई नहीं है
रात भर जो जागकर हमारी हिफाजत करे
उस ममता को लोग सिर्फ माँ कहते हैं
मेरे हर जख्म पर जो मरहम लगाती है
वो हस्ती मेरी माँ के सिवा कौन हो सकती है
उसके चेहरे की झुर्रियों में इतिहास दिखता है
मेरी माँ ने बहुत संघर्षों से मुझे पाला है
जब भी मुसीबत ने मुझ पर साया किया
माँ की दुआ ढाल बनकर आगे आ गई
खुदा ने माँ को अपनी मोहब्बत का सिला दिया
इसलिए हर दिल में माँ का दर्जा सबसे ऊपर है
मेरी खामोशी को भी जो पढ़ लेती है आसानी से
वो शख्स सिर्फ मेरी प्यारी माँ है
धूप में भी छांव का अहसास रहता है
माँ का साया जब तक सर के पास रहता है
हर बला टल जाती है चौखट से मेरी
माँ जब सजदे में दोनों हाथ उठाती है
लफ्ज़ कम पड़ जाते हैं जिसकी तारीफ में
वो खुदा की भेजी हुई सबसे पाक नेमत है
घर की वीरानी भी रौनक में बदल जाती है
जब मेरी माँ मुस्कुरा कर करीब आती है
लाख गम हों ज़माने के सीने में दबे
उसकी एक थपकी से मीठी नींद आ जाती है
तिनका-तिनका जोड़कर जिसने बनाया आशियाना
वो माँ ही है जिसे आता है खुशियां लुटाना
कोई तराजू नहीं बना इस पूरी कायनात में
जो तोल सके ममता का मोल एक बात में
मुझे कभी ठोकर लगे तो दर्द उसे होता है
औलाद दूर हो तो सारा चैन माँ का खोता है
ज़मीन पर जन्नत देखनी हो तो माँ को देख लो
खुदा की रहमत समझनी हो तो माँ को देख लो
किसी दरगाह या मंदिर में भटकने की जरूरत क्या
अगर सच्ची इबादत सीखनी हो तो माँ को देख लो
माँ के पल्लू में जो महक सुकून की बसी है
वो खुशबू दुनिया के किसी इत्र में कहाँ मिलती है
मेरी हर कामयाबी के पीछे बस एक ही राज़ है
माँ के लबों से निकली दुआओं की परवाज़ है
जो बिना कुछ कहे दिल की हर बात जान ले
वो सिर्फ माँ है जो खामोशी भी पहचान ले
थक कर जब भी लौटता हूँ शाम को घर
उसकी एक नज़र मिटा देती है थकान का असर
सारे ज़माने की मोहब्बत एक तरफ है
कौन मात दे सकेगा माँ के इस प्यार को मगर
माँ की आँखों में कभी आंसू न आने देना
ये वो मोती हैं जो कभी बाज़ार में नहीं मिलते
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मुकद्दर संवर जाता है उसका इस जहाँ में
जिसे मिल जाए माँ की दुआ हर इम्तिहान में
भूखी रहकर भी जिसने हर निवाला मुझे खिलाया
उस माँ के त्याग ने ही मुझे इंसान बनाया
दवा असर न करे तो दुआ काम आती है
मुसीबत में हमेशा माँ की सदा काम आती है
लाख चाहने वाले मिल जाएं ज़माने में
सिर्फ माँ की मोहब्बत ही बेपनाह काम आती है
जब भी मैं हारने लगता हूँ दुनिया की चालों से
माँ का हौसला मुझे दोबारा खड़ा कर देता है
खुदा ने माँ को अपने ही नूर से तराशा है
खुद आ न सका ज़मीं पर तो माँ को भेजा है
एक मुद्दत से सुकून भरी नींद को तरसता रहा
फिर याद आया कि अरसे से माँ की गोद में नहीं सोया
उसकी हथेली पर हर परेशानी का इलाज है
माँ के कदमों में दोनों जहान का राज़ है
वो सलामत रहे तो हर खुशी मुकम्मल है
मेरे सर पर उसकी दुआओं का ही ताज है
सारी दुनिया की दौलत भी फीकी पड़ जाती है
जब माँ मुस्कुराकर सीने से लगाती है
माँ की एक दुआ से बिगड़ी तकदीर संवर जाती है
किस्मत की बंद लकीर भी रास्ता दे जाती है
जिसने अपने सपनों को कुर्बान किया सिर्फ मेरे लिए
उस माँ की खुशी से बढ़कर मेरी कोई आरज़ू नहीं
घर से जब भी निकलता हूँ माँ के पाँव छूकर
हर मुश्किल राह खुद-ब-खुद आसान हो जाती है
ज़माने के किसी खौफ की परवाह नहीं मुझे
माँ की दुआ जब मेरा निगहबान हो जाती है
रब का दूसरा रूप अगर कोई देखना चाहे
तो बस अपनी माँ को मुस्कुराते हुए देख ले
धूप कितनी भी तेज़ हो साया घना रहता है
माँ का आँचल हमेशा मेरे सर पर तना रहता है
उसके होने से ही घर में बहार रहती है
माँ की दुआओं में अजीब सी खुमार रहती है
मेरी हर एक खता को वो यूँ माफ़ करती है
जैसे कोई फरिश्ता मुझ पर एहसान करती है
थक कर जब भी मैं घर को लौटता हूँ शाम को
माँ के सीने से लग कर मिट जाती है हर थकान मेरी
उसकी ममता का कोई मोल नहीं इस जहाँ में
वो खुदा का रूप है जो बसता है इस मकान में
मेरी आँखों के आँसू वो पलकों पर उठा लेती है
माँ मेरी तकलीफ बिन बोले ही जान लेती है
जिंदगी की कसौटी पर जब भी मैं हारा हूँ
माँ तेरी दुआओं ने ही हर मुश्किल को टाला है
दुआओं की छांव में उसने मुझे पाला है
उस रब ने भी माँ को अपना दूसरा रूप बनाया है
मेरी हर ज़िद को वो अपना फर्ज़ मानती है
माँ मेरे बिना कुछ भी नहीं जानती है
रात भर जाग कर उसने मेरी तबियत संभाली है
वो माँ ही है जिसने हर बला मुझ पर टाली है
उसके हाथों की बनी रोटी में जादू सा होता है
माँ के हाथों का निवाला खाकर सुकून मिलता है
जब तलक माँ की दुआओं का पहरा रहता है
मेरे रास्ते का हर पत्थर भी किनारा रहता है
दुनिया के वादे अक्सर टूट जाते हैं सफर में
माँ का साया रहता है उम्र भर असर में
मेरे माथे को चूमकर वो मेरी तकदीर बदल देती है
माँ की एक दुआ मेरी हर तस्वीर बदल देती है
वो खुद भूखी रह कर मुझे खाना खिलाती है
माँ से ज्यादा इस दुनिया में कौन मुझे चाहती है
मेरे गिरने पर जो सबसे पहले दौड़ कर आती है
वो सिर्फ माँ है जो सीने से लगा जाती है
उसकी उंगली पकड़कर मैंने चलना सीखा था
माँ के आंचल में ही मैंने सब कुछ सीखा था
कोई शिकवा नहीं अब मुझे इस ज़माने से
जब तक माँ का प्यार है मेरे आशियाने से
खामोशियाँ भी वो मेरी आसानी से पढ़ लेती है
माँ दिल का हाल बिना कहे ही समझ लेती है
मेरे हिस्से की हर खुशी उसने मुझे दे डाली
माँ ने अपनी जिंदगी मेरे नाम कर डाली
इस भागती दुनिया में चैन कहाँ मिलता है
माँ के पास बैठने से ही दिल को सुकून मिलता है
मेरी हर गलती पर वो डांट कर भी रो देती है
माँ ऐसी शख्सियत है जो सब कुछ सह लेती है
उसके चेहरे की झुर्रियों में मेरा बचपन बसता है
माँ के आंचल में ही मेरा सारा जहान हंसता है
जब भी भटकने लगता है मेरा ये कदम कहीं
माँ की याद दिला देती है मुझे मेरा वजूद यहीं

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

माँ पर शायरी क्या है?

माँ पर शायरी वह शायरी है जो माँ के लिए दिल से लिखी लाइनें लिखी जाती है। इस पेज पर 74+ मौलिक शायरी एक जगह हैं।

क्या ये शायरी मुफ़्त इस्तेमाल कर सकते हैं?

हाँ। COPY बटन दबाइए और WhatsApp स्टेटस, Instagram बायो या Facebook पर लगाइए।

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