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2 Line Shayari

75+ 2 लाइन शायरी — 2 Line Shayari in Hindi

स्टेटस और बायो के लिए छोटी शायरी। नीचे दी गई हर शायरी को एक क्लिक में कॉपी करके स्टेटस पर लगाइए।

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वो जो खामोश बैठ कर सब सुनता रहा
उसने तन्हाई से बगावत कर ली है
शहर की भीड़ में खुद को ढूँढता हूँ
आईना देखता हूँ और चौंक जाता हूँ
तेरे जाने के बाद भी तू यहीं है
तेरी यादों ने घर बना लिया है
हर नया जख्म पुराना सा लगता है
तेरा शहर अब बेगाना सा लगता है
चाँद को देख कर ये ख्याल आया
वो भी तन्हा है मेरी ही तरह
लोग कहते हैं बदल गए हो तुम
हमने कहा, मौसम का मिजाज है
तेरी फितरत थी बदलते रहना
हम ही नासमझ थे जो दिल लगा बैठे
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रास्ते में भटकने का डर नहीं अब
मंज़िल से ज्यादा सफर प्यारा है
उम्मीदों के दिए खुद ही जलाए थे
हवा चली तो सब्र का दामन थाम लिया
रात भर जागने का हुनर सीख लिया
अंधेरे से अब डर नहीं लगता
तेरी मुस्कान से शुरू हुई थी बात
अब खामोशी पर आके ठहर गई है
कागज पर लिख कर दर्द मिटाया बहुत
स्याही कम पड़ गई, मगर अक्स नहीं गया
वो मिले तो ऐसे मिले जैसे कभी बिछड़े न थे
हम बिछड़े तो ऐसे कि उम्र बीत गई
खुद से ही छुपकर रोते हैं आजकल
दुनिया को हँसाने का हुनर आ गया है
जो बात लबों तक आ न सकी
वो आँखों ने बे-परदा बयान कर दी
आईने के सामने खुद से नजरें मिलाईं
एक अजनबी ने मुस्कुरा कर पूछा, कैसे हो
फासले कम होने का नाम नहीं लेते
और नजदीकियाँ अब डराने लगी हैं
हवा के साथ चलने की आदत छूट गई
अब तो तूफानों से उलझने का शौक है
हर शाम एक नया सवाल छोड़ जाती है
जिंदगी जवाब देने से कतराती क्यों है
जो रिश्ता कभी जान से प्यारा था
आज वो एक भूला हुआ किस्सा है
तेरी यादों का शहर बहुत आबाद है
यहाँ तन्हाई को भी सुकून मिलता है
कलम उठाई तो तेरा नाम लिख दिया
फिर पन्ने पर खुद को तमाम लिख दिया
वक्त के साथ सब बदल जाते हैं
हमने तो बस आईना देखना छोड़ा है
अब किसी से कोई शिकायत नहीं बाकी
खुद से ही अपनी जंग जारी है
जिंदगी को समझने चले थे हम
और खुद ही उलझ कर रह गए
रात की गोद में सोई हुई उम्मीदें हैं
सुबह होने का भरोसा है कि ज़िद बाकी है
दिल की बस्ती में अजीब सा सन्नाटा है
कोई आवाज़ तो दे, कौन यहाँ रहता है
तेरी यादों का सफर खत्म नहीं होता है
वक्त रुक जाता है, रास्ते नहीं बदलते
हमने कागज़ पे लिखा दर्द कई रंगों से
सबने तारीफ की, हाल किसी ने न पूछा
खुद से मिलने की तमन्ना में भटक जाते हैं
रास्ता छोड़ के हम और किधर जाते हैं
चाँद निकला है तो परछाई भी लंबी होगी
धूप से डरने वालों को अंधेरा प्यारा है
मेरी आँखों में किसी और का चेहरा क्यों हो
मैंने कागज़ पे भी तस्वीर तिरी उतारी है
एक मुद्दत से तिरा इंतज़ार जारी है
रास्ते पूछ रहे हैं कि तू कब आएगा
जिंदगी एक सफर है, मैं मुसाफिर हूँ यहाँ
कोई मंज़िल नहीं, बस पाँव थके जाते हैं
लोग कहते हैं कि बदली है मेरी आदतें
हमने आईने से पूछ लिया सच क्या है
बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी
कौन इस शहर में सच बोलने की हिम्मत रखे
चुप रहना ही मुनासिब लगा इस दौर में
वरना हर शख्स यहाँ तीर चलाने पर तुला है
तेरी आँखों के समंदर में उतरना चाहा
हम किनारों पे ही खामोश खड़े रह गए
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आज फिर दिल ने तिरा नाम लिया है चुपके
जैसे सहरा में कोई फूल खिला हो चुपके
रास्तों पर जो मिटाए न मिटे नक्श तिरे
दिल की दीवारों पे हमने तिरा नाम लिखा
रात ढलती है तो इक ख्वाब नया आता है
हम जागते रहते हैं कि वो लौट के आएगा
जिंदगी बोझ नहीं, इक नया एहसास सही
हम भी इस भीड़ में तन्हाई के साथ जिए
तेरी महफिल से उठे तो हमें होश आया
हम तो दीवाने थे, दीवाना बना कर छोड़ा
कौन कहता है कि भूले हैं तुझे हम अब तक
दिल की धड़कन से तिरा नाम नहीं जाता है
अपने होने का पता ढूँढ रहा हूँ कब से
कोई नक्शा ही नहीं शहर-ए-मोहब्बत का यहाँ
कुछ अधूरे से खयालों को सजा रखा है
हमने आँखों में कई ख्वाब दबा रखा है
वक्त के साथ बदल जाते हैं चेहरों के रंग
आईना आज भी सच बोल के शर्माता है
तेरी हर बात पे इल्जाम लगाना छोड़ा
हमने खुद से ही नया रिश्ता बनाना जोड़ा
शाम ढलते ही दिए बुझने लगे हैं घर के
कोई उम्मीद का सूरज यहाँ उगता ही नहीं
बात करने को कई लोग हैं इस दुनिया में
कमी महसूस हो जिसकी, वो जुबाँ तू ही है
वक्त बदला तो चेहरे भी बदल गए
हम वही रहे बस अपने संभल गए
रात भर चाँद से तेरी बातें होती हैं
तू नहीं होती पर तेरी यादें होती हैं
सफर लंबा सही पर रास्ता अपना है
किसी और से क्या शिकवा जब टूटा सपना है
खामोशियां भी अब शोर करती हैं
तेरी यादें हमें किस ओर करती हैं
हवा के रुख पर चलना छोड़ दिया हमने
तेरा नाम दिल से लेना छोड़ दिया हमने
तलाश मंजिल की थी भटक गए हम
अपनों की भीड़ में अकेले खटक गए हम
परिंदा उड़ चला आसमान की तरफ
निगाहें फिर भी थीं इक मकां की तरफ
कागज़ की कश्ती को समंदर मिल गया
आज हमें भी कोई अपना सा मिल गया
हर एक पन्ना तेरी याद का गवाह है
इस किताब में मेरा दर्द ही दवा है
कोई पूछता है मुझसे मेरी उदासी की वजह
मैं मुस्कुरा कर टाल देता हूँ हर दफ़ा वजह
अंधेरे कमरे में इक दिया जलाया है
आज फिर हमने खुद को मनाया है
लफ्ज़ कम पड़ जाते हैं बयान करने में
उम्र बीत जाती है किसी को अपनाने में
छांव की तलाश में धूप में निकल पड़े
अपनों के बीच से कुछ यूँ फिसल पड़े
दिल की बात दिल में ही दब गई
इक हँसी के पीछे हर आह छुप गई
रेत पर नाम लिखकर मिटाया नहीं करते
जो अपने होते हैं उन्हें भुलाया नहीं करते
आँखें बंद करो तो तेरा चेहरा नज़र आता है
खुला आसमान देखो तो पहरा नज़र आता है
फासले मिटाने चले थे हम उम्र भर के लिए
और करीब आ गए कुछ पल के सफर के लिए
उम्मीदों के धागे बहुत कमज़ोर होते हैं
बिखरने के लिए तो बस भरम होते हैं
शाम ढलते ही दीये जल जाते हैं
तेरे जाने के बाद गम पल जाते हैं
सफर में मुश्किलें बहुत आएंगी दोस्त
तू कदम बढ़ाकर तो देख मंज़िल आएगी दोस्त
आईने के सामने खुद से नज़रें चुराते हैं
हम भी अजीब लोग हैं जो खुद को रुलाते हैं
पुरानी डायरी के पन्ने पलटे तो तुम मिले
सूखे हुए गुलाब में आज भी कुछ गम मिले
आसमां की ऊंचाइयों से ज़मीं अच्छी है
अपनी ही दुनिया अपनी नमी अच्छी है
दर्द की महफिल में हमने जाम पी लिया
किसी की याद में यूँ ही नाम जी लिया
कल तक जो अजनबी थे आज जान बन गए
देखते ही देखते हमारे आसमान बन गए

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2 लाइन शायरी क्या है?

2 लाइन शायरी वह शायरी है जो स्टेटस और बायो के लिए छोटी शायरी लिखी जाती है। इस पेज पर 75+ मौलिक शायरी एक जगह हैं।

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