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हिंदी-उर्दू के मशहूर कवियों की चुनी हुई पंक्तियाँ, शेर और दोहे।
काव्यकाजी नजरुल इस्लाम: हे युवा, उठो और तोड़ दो हर वह बेड़ीहे युवा, उठो और तोड़ दो हर वह बेड़ी जो तुम्हें गुलाम बनाए रखे। — काजी नजरुल इस्लाम28 Sep 2026 पढ़ें →
काव्ययशपाल: जीवन का सौंदर्य संघर्षों से भागने में नहींजीवन का सौंदर्य संघर्षों से भागने में नहीं, बल्कि उनका डटकर मुकाबला करने में है। — यशपाल27 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यफ़ातिमा शेख़: मेहनत और लगन से किया गया हर सामाजिकमेहनत और लगन से किया गया हर सामाजिक कार्य कभी व्यर्थ नहीं जाता। — फ़ातिमा शेख़27 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यसंत ज्ञानेश्वर: अवघे विश्वची माझे घर, ऐसा मतिचाअवघे विश्वची माझे घर, ऐसा मतिचा फेरा, सुख-दुःखाचा न वाटे वरा। — संत ज्ञानेश्वर26 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यअब्राहम लिंकन: मैं धीमा चलता हूँ, लेकिन मैंमैं धीमा चलता हूँ, लेकिन मैं कभी भी पीछे नहीं हटता। — अब्राहम लिंकन26 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यनिकोला टेस्ला: मौलिकता बाहरी दुनिया के शोर से दूर, शांत एमौलिकता बाहरी दुनिया के शोर से दूर, शांत एकांत वातावरण में ही सबसे बेहतर फलती-फूलती है। — निकोला टेस्ला25 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यचार्ल्स डार्विन: जीवों का विकास इस बात पर निर्भर करता है किजीवों का विकास इस बात पर निर्भर करता है कि वे अपने बदलते परिवेश के साथ कितनी जल्दी खुद को ढाल पाते…25 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यभीष्म साहनी: साम्प्रदायिकता मानवता की सबसे बड़ी दुश्मनसाम्प्रदायिकता मानवता की सबसे बड़ी दुश्मन है, जो इंसानों को बांटती है। — भीष्म साहनी24 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यभगत सिंह: कठोर नियम और आलोचना किसी भी क्रांतिकारीकठोर नियम और आलोचना किसी भी क्रांतिकारी सोच के अनिवार्य अंग हैं। — भगत सिंह24 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यगजानन माधव मुक्तिबोध: हर इंसान के भीतर एक संपूर्ण ब्रह्मांडहर इंसान के भीतर एक संपूर्ण ब्रह्मांड और एक अंतहीन संघर्ष छिपा है। — गजानन माधव मुक्तिबोध23 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यगौतम बुद्ध: दीपक की तरह बनो जो स्वयं जलकर दूसरों को रोदीपक की तरह बनो जो स्वयं जलकर दूसरों को रोशनी देता है, ज्ञान का मार्ग भी ऐसा ही है। — गौतम बुद्ध23 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यफ़नीश्वरनाथ रेणु: रेणु जी ने अपनी रचनाओं में बिहार के पूर्णिरेणु जी ने अपनी रचनाओं में बिहार के पूर्णिया जिले के मेरीगंज क्षेत्र की जीवंत तस्वीर पेश की। — फ़नीश्वरनाथ रेणु22 Sep 2026 पढ़ें →