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हिंदी-उर्दू के मशहूर कवियों की चुनी हुई पंक्तियाँ, शेर और दोहे।
काव्यनेल्सन मंडेला: जब तक काम पूरा न हो जाए, वहजब तक काम पूरा न हो जाए, वह हमेशा असंभव ही लगता है। — नेल्सन मंडेला22 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यसावित्रीबाई फुले: कठिनाइयां और सामाजिक विरोध इंसान के हौसलेकठिनाइयां और सामाजिक विरोध इंसान के हौसले को और अधिक मजबूत बनाते हैं, रुकना कभी भी विकल्प नहीं होता। — सावित्रीबाई फुले21 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यमैथिलीशरण गुप्त: संस्कृति हमारी पहचान है, एकता ही हमारीसंस्कृति हमारी पहचान है, एकता ही हमारी शान है, इस पर हमें पूरा अभिमान है। — मैथिलीशरण गुप्त21 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यघाग-भड्डरी: पूस मास जो बादल छावै, समझो बिना बरसात न जापूस मास जो बादल छावै, समझो बिना बरसात न जावै। — घाग-भड्डरी20 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यस्वामी रामतीर्थ: प्रकृति के साथ एकरूप हो जाना ही सच्चीप्रकृति के साथ एकरूप हो जाना ही सच्ची साधना और शांति का मार्ग है। — स्वामी रामतीर्थ20 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यस्वामी सहजानंद सरस्वती: भूखे पेट ईश्वर की भक्ति नहीं होती, पीड़ितभूखे पेट ईश्वर की भक्ति नहीं होती, पीड़ित किसान को रोटी दिलाना ही असली पूजा है। — स्वामी सहजानंद सरस्वती19 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यमीराबाई: हरी तुम हरो जन की पीर, द्रौपदीहरी तुम हरो जन की पीर, द्रौपदी की लाज राखी, आप बढ़ायो चीर। — मीराबाई19 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यअज्ञेय: जो नहीं हो सका पूर्ण, उसे भी पूर्ण समझो;जो नहीं हो सका पूर्ण, उसे भी पूर्ण समझो; अधूरापन ही तो जीवन का सौंदर्य है। — अज्ञेय18 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यअल्लामा इक़बाल: न पूछ इन मदरसा-वालों से मक़्सूद-ए-सबक़ क्यन पूछ इन मदरसा-वालों से मक़्सूद-ए-सबक़ क्या है, ये बेचारे तो इल्म-ए-बे-हुनर की जुस्तजू में हैं। — अल्लामा इक़बाल18 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यरहीम ख़ानेख़ाना: रहिमन ओछे नरन ते, बैर भलो ना नाइ। छाँड़ेरहिमन ओछे नरन ते, बैर भलो ना नाइ। छाँड़े ड़े काटै क्यौं भलो, काटे चाटे काइ॥ — रहीम ख़ानेख़ाना17 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यशरतचंद्र चट्टोपाध्याय: उपेक्षित और ठुकराए गए लोगों के आंसूउपेक्षित और ठुकराए गए लोगों के आंसू पोंछना ही सबसे बड़ा साहित्यकर्म है। — शरतचंद्र चट्टोपाध्याय17 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यफ़ैज़ अहमद फ़ैज़: जो रोशनी थी मिरे घर के आस-पास न थीजो रोशनी थी मिरे घर के आस-पास न थी — फ़ैज़ अहमद फ़ैज़16 Sep 2026 पढ़ें →