हिंदी में सुविचार, शायरी, शिक्षा, पैसा और बिज़नेस की जानकारी
हिंदी-उर्दू के मशहूर कवियों की चुनी हुई पंक्तियाँ, शेर और दोहे।
काव्यनिकोला टेस्ला: मौलिकता बाहरी दुनिया के शोर से दूर, शांत एमौलिकता बाहरी दुनिया के शोर से दूर, शांत एकांत वातावरण में ही सबसे बेहतर फलती-फूलती है। — निकोला टेस्ला25 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यचार्ल्स डार्विन: जीवों का विकास इस बात पर निर्भर करता है किजीवों का विकास इस बात पर निर्भर करता है कि वे अपने बदलते परिवेश के साथ कितनी जल्दी खुद को ढाल पाते…25 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यभीष्म साहनी: साम्प्रदायिकता मानवता की सबसे बड़ी दुश्मनसाम्प्रदायिकता मानवता की सबसे बड़ी दुश्मन है, जो इंसानों को बांटती है। — भीष्म साहनी24 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यभगत सिंह: कठोर नियम और आलोचना किसी भी क्रांतिकारीकठोर नियम और आलोचना किसी भी क्रांतिकारी सोच के अनिवार्य अंग हैं। — भगत सिंह24 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यगजानन माधव मुक्तिबोध: हर इंसान के भीतर एक संपूर्ण ब्रह्मांडहर इंसान के भीतर एक संपूर्ण ब्रह्मांड और एक अंतहीन संघर्ष छिपा है। — गजानन माधव मुक्तिबोध23 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यगौतम बुद्ध: दीपक की तरह बनो जो स्वयं जलकर दूसरों को रोदीपक की तरह बनो जो स्वयं जलकर दूसरों को रोशनी देता है, ज्ञान का मार्ग भी ऐसा ही है। — गौतम बुद्ध23 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यफ़नीश्वरनाथ रेणु: रेणु जी ने अपनी रचनाओं में बिहार के पूर्णिरेणु जी ने अपनी रचनाओं में बिहार के पूर्णिया जिले के मेरीगंज क्षेत्र की जीवंत तस्वीर पेश की। — फ़नीश्वरनाथ रेणु22 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यनेल्सन मंडेला: जब तक काम पूरा न हो जाए, वहजब तक काम पूरा न हो जाए, वह हमेशा असंभव ही लगता है। — नेल्सन मंडेला22 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यसावित्रीबाई फुले: कठिनाइयां और सामाजिक विरोध इंसान के हौसलेकठिनाइयां और सामाजिक विरोध इंसान के हौसले को और अधिक मजबूत बनाते हैं, रुकना कभी भी विकल्प नहीं होता। — सावित्रीबाई फुले21 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यमैथिलीशरण गुप्त: संस्कृति हमारी पहचान है, एकता ही हमारीसंस्कृति हमारी पहचान है, एकता ही हमारी शान है, इस पर हमें पूरा अभिमान है। — मैथिलीशरण गुप्त21 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यघाग-भड्डरी: पूस मास जो बादल छावै, समझो बिना बरसात न जापूस मास जो बादल छावै, समझो बिना बरसात न जावै। — घाग-भड्डरी20 Sep 2026 पढ़ें →
काव्यस्वामी रामतीर्थ: प्रकृति के साथ एकरूप हो जाना ही सच्चीप्रकृति के साथ एकरूप हो जाना ही सच्ची साधना और शांति का मार्ग है। — स्वामी रामतीर्थ20 Sep 2026 पढ़ें →