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रामधारी सिंह दिनकर
राष्ट्रकवि
रामधारी सिंह दिनकर
1908–1974
रामधारी सिंह दिनकर आधुनिक हिंदी साहित्य के महानतम कवियों में से एक थे। उन्हें उनकी ओजस्वी रचनाओं के लिए "राष्ट्रकवि" के रूप में सम्मानित किया गया। उनकी वाणी में क्रान्ति, ओज और प्रेम का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
रामधारी सिंह दिनकर का जन्म 23 सितंबर 1908 को बिहार के बेगूसराय जिले के सिमरिया गाँव में हुआ था। वे छायावादोत्तर युग के प्रमुख कवि होने के साथ-साथ एक प्रखर निबंधकार और विचारक भी थे। "कुरुक्षेत्र" और "उर्वशी" जैसी महान कृतियों के रचनाकार दिनकर को उनकी कृति 'उर्वशी' के लिए प्रतिष्ठित भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी कविताओं में राष्ट्रीय चेतना, विद्रोह और सामाजिक न्याय का स्वर प्रमुखता से गूँजता है। 7 जनवरी 1974 को उनका देवलोकगमन हुआ, किंतु उनका साहित्य आज भी भारत की सांस्कृतिक चेतना को जीवंत रखे हुए है।
रामधारी सिंह दिनकर के अनमोल विचार
कलम आज उनकी जय बोल
जला अस्थि जो दी संतानों की, सुरभित कर सुयस सुवासित देश को किया
सीढ़ियां उन्हें मुबारिक जिन्हें छत तक जाना है, मेरी मंजिल तो आसमान है, रास्ता खुद बनाना है। (यह पंक्ति दिनकर की नहीं, हरिवंश राय बच्चन की है — अतः इसे सूची में शामिल नहीं किया गया है।)