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स्वामी रामतीर्थ
संत
स्वामी रामतीर्थ
1873–1906
स्वामी रामतीर्थ (1873–1906) एक महान संत, दार्शनिक और वेदांत के प्रचारक थे। उन्होंने अपने ओजस्वी भाषणों से पश्चिमी देशों में भारतीय अध्यात्म की गहरी छाप छोड़ी। अल्पायु में ही उन्होंने संन्यास लिया और गंगा तट पर महासमाधि ली।
स्वामी रामतीर्थ का जन्म 22 अक्टूबर 1873 को पंजाब के गुजरांवाला जिले के मुरावाला गाँव में हुआ था। उनका पूर्व नाम तीर्थ राम था और वे लाहौर के मिशन कॉलेज में गणित के प्रोफेसर रहे। उन्होंने अपनी शिक्षा और व्याख्यानों के माध्यम से वेदान्त के व्यावहारिक स्वरूप को दुनिया के सामने रखा। स्वामी जी ने जापान और अमेरिका की यात्रा कर भारतीय दर्शन का डंका बजाया। उनका जीवन त्याग, प्रेम और ईश्वर-भक्ति का अद्वितीय संगम था। मात्र 33 वर्ष की आयु में 17 अक्टूबर 1906 को उन्होंने गंगा नदी में जलसमाधि ले ली।
स्वामी रामतीर्थ के अनमोल विचार
मैं ही वह ज्योति हूँ जो सारे ब्रह्मांड को प्रकाशित कर रही है।